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Sameeksha ke Bhaashik Aayaam

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Author Name – dr. varun kumaar
“प्रख्यात विद्वान श्री वरुण कुमार जी के निबंधों की यह पुस्तक साहित्य एवं भाषा के प्रश्नों पर गंभीरता से विचार करती है। कविता, कथा तथा सिद्धांतों के निर्माण, संरचना एवं प्रभावों की विशद चर्चा वरुण जी ने की है।

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समीक्षा के भासिक आयाम - Sameeksha ke Bhaashik Aayaam

Description

“प्रख्यात विद्वान श्री वरुण कुमार जी के निबंधों की यह पुस्तक साहित्य एवं भाषा के प्रश्नों पर गंभीरता से विचार करती है। कविता, कथा तथा सिद्धांतों के निर्माण, संरचना एवं प्रभावों की विशद चर्चा वरुण जी ने की है। शैलीविज्ञान और काव्यशास्त्र के सूत्रों का सम्यक् उपयोग करते हुए वरुण कुमार रचना की आंतरिक सममिति का तीक्ष्ण विश्लेषण करते हैं। हिन्दी भाषा के अनेक रूपों, राजभाषा विषयक समस्याओं एवं भूमंडलीकरण के दौर में हिन्दी की भावी भूमिका पर गहन विचार करते हुए लेखक एक उत्खनक की भाँति सूक्ष्मतापूर्वक अपना काम करता है। आशा है विचारवान पाठक इसे अंगीकार करेंगे। अरुण कमल”

About The Author

“वरुण कुमार का साहित्यिक पक्ष भी उतना ही मजबूत है। इस पुस्तक में शामिल ‘निर्मल वर्मा की कथा भाषा’, ‘आधुनिक काव्य की बढ़ती गद्यात्मकताः कुछ विचार’, ‘समीक्षा के भाषिक आयाम’ … इसके अप्रतिम उदाहरण हैं। हर लेख में निराला, महादेवी वर्मा, प्रसाद, रघुवीर सहाय, सर्वेश्वर और उनकी काव्य पंक्तियाँ बार-बार आती हैं। हिंदी साहित्य का पूरा संसार शामिल है। दुष्यंत कुमार से लेकर नए नए लेखक मंगलेश डबराल, कृष्णा सोबती, भीष्म साहनी, अरुण कमल आदि। और सिर्फ नाम के लिए नहीं, उनकी काव्य प्रवृत्तियाँ, भाषिक संरचना, उनके गद्य या पद्य में समाहित दर्शन और विचार से लेकर उसकी व्याकरणिक संरचना तक। ऐसा तभी संभव है जब साहित्य आपकी रगों में दौड़ता हो और ऐसा व्यक्ति ही साहित्य और भाषा को संपूर्णता में बढ़ाने की सोच सकता है। ‘आधुनिक काव्य की बढ़ती गद्यात्मकता कुछ विचार’ इतना गंभीर विश्लेषण है कि आइंस्टाइन के फार्मूले की तरह पहली बार में आपके सिर से गुजर सकता है। आश्चर्य होता है कि क्या साहित्य का विश्लेषण इतना माइक्रो लेवल पर ऐसे औजारों से भी हो सकता है? शमशेर बहादुर सिंह की एक प्रसिद्ध कविता है “”एक नीला दरिया बरस रहाध और बहुत चौड़ी हवाएँ हैं/मकानात हैं जंगल/मगर किस कदर उबड़ खाबड़ ।”” उसकी मात्राएँ व्याकरण के आधार पर ऐसा विश्लेषण वरुण कुमार जैसा विद्वान ही कर सकता है! यह सब संभव है क्योंकि उनका अध्ययन संसार विशाल है। और सोने में सुहागा है उनकी भाषा, साहित्य और समाज की समझ ।

-प्रेमपाल शर्मा

लेखक और पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, रेल मंत्रलय”

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