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स्त्री के हक़ में कबीर

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Author Name – Anil Rai
क्यों कबीरदास स्त्री को माया और नरक का कुंड कहते हैं, जबकि वही कबीर साधना की पराकाष्ठावस्था में स्वयं स्त्री बन जाते हैं।

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स्त्री के हक़ में कबीर - Shtri Ke Haq Main kabir

Description

क्यों कबीरदास स्त्री को माया और नरक का कुंड कहते हैं, जबकि वही कबीर साधना की पराकाष्ठावस्था में स्वयं स्त्री बन जाते हैं। अपने को राम की बहुरिया कहते हैं और सामान्य प्रेमी-प्रेमिका की भाँति विरह और मिलन के आध्यात्मिक अनुभव के क्षणों का एहसास कराते हैं। वे ‘बालम आव हमारे गेह’ और ‘तुम बिन दुखिया देह रे जैसी पंक्तियों के माध्यम से मानवीय सम्बन्धों की उष्मा का एहसास कराते हैं। वे माँ का जैसा सुंदर चित्रा खींचते हैं क्या किसी सगुण भक्त कवि के यहां पाया जा सकता है। युगीन परिस्थितियों और मध्यकालीन सामंती समाज के परिप्रेक्ष्य में जब हम कबीर की स्त्री-दृष्टि पर विचार करते हैं तो हम यह पाते हैं कि वे समग्रतः स्त्री विरोधी नहीं बल्कि स्त्री के हक में खड़े होते दिखते हैं।

About The Author

“अनिल राय जन्म: 1963, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय से एम. ए., एम. फिल., पी. एच. डी.। ढाई वर्ष तक दक्षिण एशिया अध्ययन विभाग, पीकिंग विश्वविद्यालय, बीजिंग (चीन) में विजिटिंग प्रोफेसर रहे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू कॉलेज और शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज़ की गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन रहे। इस समय हंसराज कॉलेज (दि. वि. वि.) की गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं। भारत के कई केन्द्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों के अध्ययन मंडल (बोर्ड ऑफ स्टडीज़) के सदस्य हैं। निर्गुण काव्य में नारी, आदिकालीन हिंदी साहित्यः अध्ययन की दिशाएँ, निबंधों की दुनिया
शिवपूजन सहाय, चीनी लोक कथाएँ, माओ के देश में इत्यादि पुस्तकों के साथ ही विभिन्न पत्रा-पत्रिकाओं में शोध लेख, समीक्षाएँ, कहानियाँ और कविताएँ प्रकाशित ।संप्रति : हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ।”

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