राष्ट्रधर्म की वैचारिकि - Raashtradharm kee vaichaarikee
Description
“पत्रकारिता का धर्म, उसकी आचार संहिता के अनुपालन से ही सिद्ध होता है। पत्रकारिता के उद्देश्य, उसके कार्य क्षेत्र एवं कार्य- निष्पादन के प्रयोजन भी समाज एवं राष्ट्रहित के लिए सुनिश्चित और समर्पित होते हैं। ‘राष्ट्रधर्म’ भी हिंदी एवं देश की एक ऐसी ही विलक्षण, दुर्लभ और ऐतिहासिक सांस्कृतिक पत्रिका है। जिसने बेबाकी से निडरता तथा पूर्णतः समर्पित भावना से स्वर्गीय भाऊराव जी देवरस, पंडित दीनदयाल उपाध्याय तथा नाना जी देशमुख जैसे राष्ट्रनायकों की वैचारिकता को उनके राष्ट्रदर्शन को प्रचारित प्रसारित करने में रचनात्मक भूमिका निभाई। राष्ट्रभक्ति क्या होती है. उसका निर्वाह कैसे और क्यों होना चाहिए उसके लिए मन वचन कर्म से राष्ट्रवासियों को कैसे तैयार करना होता है इन सब दायित्वों का निर्वाह इस पत्रिका ने तथा इसके बीज वपन से जुड़े राष्ट्रभक्तों और प्रतिष्ठित पत्रकारों ने बखूबी किया है।
प्रो. पूरनचन्द टंडन
वरिष्ठ आचार्य, हिंदी विभाग
दिल्ली विश्वविद्यालय”
About The Author
“अखिलेश कुमार पाण्डेय
जन्म : 05/01/1992 जनपद सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश)।
शिक्षा : बचपन की शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई।
तत्पश्चात जनपद जौनपुर के प्रतिष्ठित श्री गांधी स्मारक इंटर कालेज समोध पुर जौनपुर से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा इलाहाबाद समेत देश के प्रतिष्ठित पांच विश्विद्यालय से हुई। सन् 2018 ई० में लखनऊ विश्वविद्यालय से एम० फिल० की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात वर्तमान में दिल्ली विश्विद्यालय के हिंदी विभाग में पीएचडी उपाधि हेतु शोधरत।
साहित्यिक गतिविधियां : विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र
पत्रिकाओं में अब तक कुल लगभग दस शोध आलेख प्रकाशित। अनेक राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सांस्कृतिक संगोष्ठी सेमिनार में संचालन संबोधन और सक्रिय सहभागिता।
सम्मान : (i) राज्यपाल पदक सम्मान उत्तर प्रदेश भारत
स्काउट गाइड। (ii) राष्ट्रपति पदक सम्मान (2009 ईस्वी) भारत स्काउट गाइड।
अकादमिक उपलब्धि: (i) झारखंड राजकीय इंटर कालेज
परीक्षा 2016 (ii) उत्तर प्रदेश मा०शि० से० चयन बोर्ड प्रयागराज परीक्षा 2016. (iii) यूजीसी नेट जेआरएफ जुलाई 2016.”






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