नेपाल में राजशाही, लोकतंत्र और शिक्षा - Nepaal mein raajashaahee lokatantr aur shiksha 25
Description
नेपाल में राजनीतिक आंदोलन के विभिन्न चरणों के दौरान, शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग बनी रही। निजी मुनाफा कमाने वाले स्कूलों को बंद करने और संस्कृत भाषा के शिक्षण को स्कूलों से हटाने की मांग जनयुद्ध की रणनीति का हिस्सा थीं। परम्परागत रूप से उच्च जाति और पुरुषों के वर्चस्व वाली शिक्षा प्रणाली की विषम संरचना को वंचित समूहों के लोगों की अपेक्षा के अनुरूप परिवर्तित करने के लिए कुछ प्रयास किए गए। इसी तरह, नेपाल की विविधता को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए पाठ्यपुस्तकों में कुछ बदलाव हुए। क्षेत्रीय विषमता और उसमे शिक्षा की चुनौती का समाधान करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर भी कुछ पहल की गई ।
About The Author
संजीव राय की यह पुस्तक नेपाल में राजनीतिक आंदोलन के उभार और समय-समय पर हुए महत्वपूर्ण बदलाव, उसमे शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका की पड़ताल भी करती है। इसमें नेपाल में शिक्षा के विस्तार का लेखा-जोखा भी मिलता है और नई चुनौतियों का भी संकेत है। राणा निरंकुशता से कार्यकारी राजशाही तक और संवैधानिक राजशाही से लेकर बहुदलीय लोकतंत्र तक जो परिवर्तन हुए उनके कारणों और परिणाम में शिक्षा कहाँ खड़ी होती है, उसका विश्लेषण इस पुस्तक की विशेषता है। यह पुस्तक नेपाल में बदलाव और विकास पर एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है और नेपाल में रुचि रखने वाले विद्वानों और पाठकों दोनों के लिए बहुत उपयोगी होगी, ऐसा मेरा विश्वास है






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