हिंदी काव्य में शिव तत्व - Hindee kaavy mein shiv tatv
Description
आधुनिक हिंदी काव्य में शिव तत्त्व का पुनर्परिशोधित स्वरूप देखने को मिलता है।
प्रसाद (कामायनी) और निराला (राम की शक्तिपूजा) नागार्जुन (भस्मांकुर) दुष्यंत कुमार (एक कंठ विषपायी) और उद्धांत (रुद्रावतार) जैसे कवियों ने शिव को आत्मतत्त्व, क्रांति और शाश्वत ऊर्जा के रूप में निरूपित किया ।
समकालीन हिंदी काव्य में शिव को पुनः एक शक्ति तत्त्व, वैराग्य एवं चेतना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। शिव का अर्धनारीश्वर रूप स्त्री-पुरुष समरसता का प्रतीक है, तो वहीं योगी स्वरूप ध्यान और समाधि का आधार। उनके तांडव में महाकाल की गूंज है, तो उनके करुणामय रूप में समस्त सृष्टि के प्रति प्रेम व शिव तत्त्व की यह व्यापकता हिंदी काव्य में सर्वदा विद्यमान रही है और यह न केवल दार्शनिक अपितु सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विमर्शों का मूलाधार बनी रहेगी।
About The Author
प्रो नंदकिशोर सिंह ने हिंदी प्राध्यापक के रूप में सुदीर्घ काल तक पूर्वोत्तर में हिंदी भाषा और साहित्य को लोकप्रिय बनाने का काम किया और इस अवधि में अनेकानेक सुयोग्य शिष्यों को भी पैदा किया। उनकी स्मृति में उनके गाँव पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में उनके प्रेमियों की जीवंत उपस्थिति उनकी महिमा का प्रमाण है। योग्य शिक्षकों का कभी तिरोभाव नहीं होता; वो अपनी यशकाया में सर्वदा अमर रहते हैं। मैं स्व० नंद किशोर सिंह जी के योग्य आत्मज श्री संजय सिंह जी को आत्मीय शुभकामनाएँ देता हूँ जिन्होंने बहुत तत्परता से इसे प्रकाशित करने का बीड़ा उठाया। इस कृति के प्रकाशन के लिए हंस प्रकाशन के श्री हरेंद्र तिवारी जी को बहुत साधुवाद देता हूँ जिन्होंने बहुत सुरुचि से उसे पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत किया है। मुझे विश्वास है कि प्रो नंदकिशोर सिंह की यह सुंदर, प्रामाणिक और तलस्पर्शी कृति ‘शिव तत्त्व’ को समझने के साथ-साथ हिंदी कविता में शिव भाव का संधान करने के लिए सभी शोधकर्ताओं का निरंतर मार्गदर्शन करेगी






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