विमर्श का स्त्री पक्ष ( उषा प्रियंवदा का साहित्य) - Vimarsh ka stri paksh (Usha priyamvada ka sahitya)
Description
विमर्श का स्त्री पक्ष: उषा प्रियंवदा का साहित्य’
नामक आलोचनात्मक पुस्तक में नारी की समस्याएँ, उसकी अधःपतन स्थिति, ऐतिहासिक परंपरा एवं सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करने का स्तुत्य प्रयास है। विवेच्य पुस्तक में स्त्री का वह चिंतन है जो न केवल निश्चित अवधारणा देता वरन नए समाज एवं बदलते परिवेश के साथ स्त्री को समझने का सलीका भी बयां करता है। शिक्षा के प्रचार-प्रसार एवं सरकार के अनगिनत प्रयासों के बावजूद आज भी नारी शोषण का भीषण रूप दिखाई देता है। पुस्तक में नारी जीवन के उन विविध पक्षों पर प्रकाश डाला गया है जहाँ स्त्री अब तक दलित, दमित, उपेक्षित और वंचित होती रहीं हैं। वर्तमान नारी का जीवन विविध संघर्ष, संत्रास तथा आपाधापी से ग्रस्त है। बदलते समय के साथ नारी की स्थिति में बहुत परिवर्तन आया है। नारी में बहुआयामी जीवन और प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न हुई है और वह निरंतर अपने ऊँचे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील है। वह परिवार की रूढ़ियों और मान्यताओं का विरोध करने लगी हैं। इस पुस्तक में नारी जीवन, उसकी विसंगतियों और सामाजिकता का सहज व सरल चित्रण किया गया है। पुस्तक में भारतीय व पाश्चात्य संस्कृति की विचारधाराओं का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही विदेश में बसे पति के साथ जीवन यापन करने वाली भारतीय नारी के सुख-दुख को बड़ी मार्मिक दृष्टि से उभारा गया है। मुझे उम्मीद है कि इस पुस्तक से नारी के सहज-सरल और सहृदय मन को समझा जा सकता है।
About The Author
डॉ० मानवती देवी निगम
माता : श्रीमती मुन्नी देवी
पिता
: श्री नबाब दास
पति
: श्री जयप्रकाश
भाषाई ज्ञान : हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत
जन्म स्थान : आगरा (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा : स्नातकोत्तर (हिंदी-संस्कृत), एम. फिल (हिंदी साहित्य), पी-एच.डी. (हिंदी साहित्य), कंप्यूटर डिप्लोमा
प्रकाशन : उत्कृष्ट जनरल में शोध आलेख, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में आलेख वाचन तथा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता, गज़ल एवं कहानियों का प्रकाशन ।






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