आधुनिक जीवन का बदलता स्वरूप - Aadhunik jeevan ka badalata svarup
Description
आधुनिकता की शुरुआत कब और कहाँ से हुई, इसकी खोजबीन करते हुए किसी निश्चित तिथि की तलाश करना एक निरर्थक उपकरण है क्योंकि जिसे हम आधुनिक कहते हैं उसे एक विशेष ऐतिहासिक प्रक्रिया में अर्जित किया गया है, ना की किसी एक विशेष तिथि से शब्दार्थ की बात करें तो यह अंग्रेजी के मॉडर्न (उवकमतद) शब्द की व्युत्पत्ति, लैटिन भाषा के (उवकव) से उत्पन्न मोटो का शाब्दिक अर्थ प्रचलन है इससे यह अर्थ निकलता है कि जो आज कुछ प्रचलन में है वह कल प्राचीन ज़रूर होगा, परिवर्तन सृष्टि का नियम है।
आज के बदलते समाज में मानवीय संबंधों की जटिलता पुराने संबंधों का टूटना अनाम संबंधों का स्थापित होना, समाज के बीच रहकर भी अपने को अलग और एकांकी की का एहसास होने पर भी नकली चेहरा धारण करके उनको निभाने का नाटक करना आदि आज कथा साहित्य में प्रतिबिंबित होती है। अर्थ के दबाव और वैज्ञानिक तर्क के कारण यथार्थ के धरातल पर सामाजिक संबंधों के मानदंड टूटे और टूटते जा रहे हैं।
About The Author
डॉ. मोनिका देवी
जन्म : कादरगढ़, जिला शामली (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा: प्रारंभिक शिक्षा ग्रामीण विद्यालय में, स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा मद्रास से एम.फिल्. और उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद से हिंदी साहित्य में पी-एच.डी.। हैदराबाद के ही प्रख्यात स्वयत्त निजाम कॉलेज से अनुवाद अध्ययन में डिप्लोमा।
प्रकाशित पुस्तकें : अंतिम दशक की कहानियों में वैचारिक
संघर्ष, अनुवाद के विविध आयाम, भगवतीशरण मिश्र के उपन्यास लक्ष्मण रेखा में समकालीनता बोध, समकालीन कहानियों में विविध विमर्श, समकालीन उपन्यासों में विविध विमर्श, ‘अस्तित्व की तलाश में सिमरन’ किन्नर जीवनीपरक उपन्यास है जिस पर पीएच.डी. और एक एम.फिल्. शोध कार्य हो चुका है, विभिन्न परिस्थितियों से जूझती नारी (संपादित पुस्तक)।
साहित्यिक गतिविधियाँ सदस्य सपांदन मंडल बोहल शोध मंजूषा, शोध दर्पण (मासिक), हिंदी की गूंज अंतर्राष्ट्रीय ई-पत्रिका, जापान।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शोध और सृजनात्मक पत्र-पत्रिकाओं, समाचारपत्रों में निरंतर लेखन और भागीदारी। आकाशवाणी से काव्य पाठ और साक्षात्कार प्रसारण। हिंदी के समकालीन युवा साहित्यकारों में पहचान।
सम्मान और पुरस्कार पी-एच.डी. उपाधि के उत्तमोत्तम शोध कार्य के लिए ‘बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन’ से शताब्दी सम्मान, साहित्य अकादमी संस्कृति परिषद, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग-भोपाल, श्रीमती सरवती देवी सम्मान, काव्य रंगोली संस्था द्वारा साहित्य रंगोली सम्मान, निर्मला हिंदी साहित्य रत्न सम्मान, राष्ट्रीय रत्न सम्मान, प्रतिभा रक्षा सम्मान समिति






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