अज्ञेय का काव्य संवेदना और शिल्प - Agyey ka kaavy sanvedana aur shilp
Description
अज्ञेय के इसी कवि रूप के विभिन्न पक्षों-अनुभव, अनुभूति और अभिव्यक्ति को आधार बना कर कवि-आलोचक डॉ. राहुल ने अपनी पुस्तक ‘अज्ञेय का काव्य संवेदना और शिल्प’ में अज्ञेय की काव्य सर्जना, वैयक्तिक और सामाजिक विवृति, अज्ञेय काव्य के दार्शनिक प्रत्ययों, प्रकृति और उसके सौंदर्यबोध, विम्ब विधान, प्रतीक प्रयोगों और काव्य भाषा की सर्जनात्मकता को बहुत ही मनोयोग से विवेचित-विश्लेषित किया है और इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि अज्ञेय की कविता का सौंदर्यबोध जहाँ भाषा की दृष्टि से अनूठा और अप्रतिम है, वहीं उनकी कविता में बिम्बों का प्रयोग कविता का चाक्षुष बिम्बों से समृद्ध करता है। डॉ. राहुल ने अज्ञेय के कविता संसार की विचार और संवेदना बहुल वीथियों में प्रवेश करते हुए कविता के अलंकरणों की दृष्टि से प्रतीक और बिंब के अनूठे और अप्रतिम प्रयोगों की ओर ध्यान दिलाते हुए यह स्थापित किया है कि अज्ञेय का कविता संसार किसी प्रकार के
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डॉ. राहुल ने अज्ञेय की इन उपरिलिखित विशिष्टताओं के दायरे में प्रवेश करते हुए अज्ञेय को कविता-चिंतन की सनातन प्रतिभा मानते हैं। यद्यपि अज्ञेय उन रचनाकारों में हैं जिनका गद्यकार या कथाकार रूप उनके कवि रूप से कहीं कमतर नहीं है तथापि अज्ञेय मूलतः कवि के रूप में ही विख्यात हैं। डॉ. राहुल ने अज्ञेय के काव्य पक्ष में बहुश्रुत गुणों को एक बार फिर मूल्यांकन की कसौटी पर कसते हुए अज्ञेय के कवित्व को बहुमान दिया है, यह स्वागतयोग्य कदम है।






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