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सपनो का ट्रांसमिशन

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Author Name – इशिता आर गिरीश
कहानी में किस्सागोई न हो तो काहे की कहानी.
कहानी में कथारस न हो तो खारा यथार्थ किस काम का. यथार्थ को शिल्प में गूँथा न जाये तो प्रगतिशीलता खाली नारा हो कर रह जाए और यदि शिल्प के नाम पर भाषा का जंजाल इतना घना हो जाए कि यथार्थ ही धुंधला जाए तो ऐसा शिल्प भी किस काम का. कहानी में अंत तक जिज्ञासा को बनाए रखना और शिल्प की सान पर जटिल यथार्थ को प्रकट करना

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सपनो का ट्रांसमिशन - Sapanon ka Traansamishan

Description

“कहानी में किस्सागोई न हो तो काहे की कहानी. कहानी में कथारस न हो तो खारा यथार्थ किस काम का. यथार्थ को शिल्प में गूँथा न जाये तो प्रगतिशीलता खाली नारा हो कर रह जाए और यदि शिल्प के नाम पर भाषा का जंजाल इतना घना हो जाए कि यथार्थ ही धुंधला जाए तो ऐसा शिल्प भी किस काम का. कहानी में अंत तक जिज्ञासा को बनाए रखना और शिल्प की सान पर जटिल यथार्थ को प्रकट करना, रस्सी पर संतुलन साध कर चलने वाली नटी के हुनर से कम नहीं. इधर कथ्य और शिल्प के बीच का संतुलन बिगड़ा तो उधर कहानी रसातल में. ईशिता आर गिरीश की कहानियों का परिवेश विविधता लिए हुए है. सौकणें, लाले की नूह और मेंडकी जिस ग्रामीण परिवेश की कहानियाँ हैं उन्हें पढ़ने के बाद हॉऽऽय डूड जैसी शहरी परिवेश में पल-बढ़ रहे तरुणों के अन्तर्मन की व्यथा कहना नितांत अलग प्रयोग है. आगे बढ़ें तो आखिरी भूत और सुंगसुरई और सपनों का ट्रांसमिशन …. जैसी कहानियों का जादुई यथार्थ आपको नितांत भिन्न धरातल पर ले जाएगा. एक अलग कथा संसार आपके सामने खुलता चला जाएगा . शिल्प ही वह औजार है जो कहानी को पाठक के लिए प्रामाणिक बनाता है. ईशिता अपने पात्रों की भाषा को ले कर खासी सजग हैं और उनके पात्रों के संवाद पूरे परिवेश को प्रामाणिकता प्रदान करते हैं. एक कहानीकार के सामने कथ्यानुरूप शिल्प को साध पाने की चुनौती हमेशा मौजूद रहती है. इस चुनौती पर खरा उतरते हुए ईशिता की दस कहानियों का यह संग्रह आपको आश्वस्त करेगा. आइए पढ़ते हैं. – निरंजन देव शर्मा”

About The Author

“ईशिता आर, गिरीश

जन्म – 9 अगस्त 1968, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश जीवन क्रम- घर में साहित्यिक वातावरण के चलते बचपन में पास पड़ोस के बच्चों को इकट्ठा कर कहानी रचने और कहने में विशेष रुचि, व कहानियां पढ़ने का चस्का था। कॉलेज के दिनों में कविता को नया मोड़, 1987 के पश्चात फिर से कहानी रचने की ओर रुझान। कुछ पत्रिकाओं के लिये अंग्रेजी से हिन्दी अनुवाद किये, स्केच बनाने में रुचि! तैलचित्र और फैबरिक आर्ट भी बनाती हैं।

शिक्षा- बी. ए., ऑनर्ज अंग्रेजी, एम. ए. अंग्रेजी, बी. एड

प्रकाशन- विभिन्न प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय पत्र

पत्रिकाओं में कविताएं, कहानियां व अनुवाद प्रकाशित। एक कविता संग्रह, ‘अपने साये से’, उपन्यास, ‘रीवा’ और परवरिश पर एक पुस्तक, ‘सबसे अच्छा बच्चा’ प्रकाशित !

सम्प्रति- अवर लेडी ऑफ द स्नोज स्कूल, कुल्लू में बतौर अध्यापिका अंग्रेजी कार्य करके अब सेवानिवृत। लेखन, सामाजिक कार्यों और चित्रकला में संलग्न”

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