नयी प्रेम कहानी - Nayee prem kahaanee
Description
कमलेश भारतीय का नया कथा संग्रह-नयी प्रेम कहानी। सचमुच नाम से ही नहीं बल्कि अपनी एक दर्जन कहानियों की ताज़गी से पाठक को आकर्षित करेगा। नयी प्रेम कहानी जहां एक असफल प्रेम की कथा है वहीं किसी भी शहर में आतंकवाद का चेहरा सामने लाती है। बस, थोड़ा सा झूठ और कब गये थे पिकनिक पर छोटी पर उतनी ही प्रभावी कहानियां हैं। अपडेट और धुंध में गायब होता चेहरा राजनीति के अलग अलग चेहरे दिखाने में सफल हैं। महक से ऊपर और इसके बावजूद ही नहीं बल्कि अतीत से अलग नहीं बिल्कुल अलग मिजाज की कहानियां हैं। पड़ोस बिल्कुल अपनी तरह की कहानी है और बहुत कुछ कहती है। कब्रिस्तान पर मकान आपको देश व समाज के बारे में बहुत कुछ सोचने पर विवश कर देगी। इतना कहा जा सकता है कि कमलेश भारतीय की कहानियों की भाषा और प्रवाह पाठक को अपने साथ साथ बहाये लिए चलता है। यही इन कहानियों की सबसे बड़ी खूबी है और ये पठनीय कहानियां हैं क्योंकि ये एक पत्रकार की सहज भाषा में लिखी गयी हैं। एक बार नयी प्रेम कहानी कथा संग्रह को हाथ में लेकर पढ़ना शुरू तो कीजिए…. इनमें आपको घर, समाज व राजनीति के अलग अलग रूप दिखाई देंगे।
About The Author
“कमलेश भारतीय की रचनात्मक पात्रा का लगभग आधी सदी से साक्षी हैं। एक रचनाधर्थी यात्री के रूप में सकारात्मक सोच और सामाजिक प्रतिवद्धता की उनकी यात्रा को विभिन्न विधाओं में मैंने देखा परखा है। उनके अंदर एक बेबाक पर संवेदनशील सजग पत्रकार है जो उन्हें चिरन्तर विवश करता है कि वे ऐसे शब्द रखें जो भानन समाज की बेहतरी के लिए हुए हों। लघु कथा साहित्य में उनकी एक मुकाम है। पर कच्च की मांग पर ने कहानी भी रखते हैं।
कमलेश भारतीय का कथनी संकलन, ‘यह आम रास्ता नहीं है’ जो मुझे समर्पित भी है, मैंने पूरा पड़ा है और उनकी कहानी कला को बहुत सभीप से जाना है। कमलेश भारतीय की कहानियों में जहां आधुनिकता है वहीं गांवे की पनात्रियों पर चलते हुए मां और मिट्टी जैसे संदेश भी। आज दुख इस बात का है कि बिना चिंतन मनन के लिखा जा रहा है इसलिए काफी उथला लेखन सामने आ रहा है। कमलेश भारतीय विसंगतियों को उजागर करने में भी सक्षम हैं। उनके पास अंग्य की प्रखर दृष्टि है जओ हमते समय की विसंगतियों को प्रत्यक्ष करती है। इस दृष्टि से अपडेट और अपता शिकार कहानियां मेरी पसंदीदा कहानियां 12
मेरी सुभकामनाएं हैं कि कमलेश भारतीय की सक्रिय लेखनी निरन्तर उनके अनुभवों को सक्छ कर, हिंदी कापी को समृद्ध करती रहे।
प्रेम जनमेजय”






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