यह बड़ी नमकीन मिट्टी है - Yah Badi Namkeen Mitti Hai
Description
“यह ऐतिहासिक उपन्यास मिथिलांचल के उन भूले हुए स्वतंत्रता सेनानियों से हमें रूबरू करवाता है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुरबान कर दिया पर स्वंय गुमनामी की जिंदगी जीते रहे। यह कथा है मगन गाँधी आश्रम के निर्माण की जिसने समाजिक कुरीतियों के खिलाफ शंखनाद कर मिथिला समाज में उथल-पुथल मचा दी तथा कुछ ही समय में वहाँ की राजनीति के केंद्र में आ समाज को बदलने की पहल कर डाली।
यह कथा है श्रीराम पिपरा नामक एक छोटे से गाँव की जहाँ ऊसर मिट्टी से नमक बना कर स्वतंत्रता के दीवानों ने एक तरफ नमक सत्याग्रह की लोकप्रियता को मिथिलांचल के जन-जन तक पहुँचाया वहीं दूसरी ओर लोगों को ब्रिटिश शासन से भयमुक्त भी किया। यह उपन्यास रूढ़ियों को तोड़ मिथिला में हुए पहले विधवा विवाह को अंजाम देने की कहानी भी सुनाता है और अदम्य साहस का परिचय देने वाले इस क्षेत्र के वीर बाँकुरों की भी जिन्होंने नेपाल के जंगलों में आजाद दस्ते का निर्माण किया। लेखिका समय की धूल झाड़ समाज द्वारा विस्मृत ऐसे नायकों से हमारा परिचय करवाती हैं जो अब तक हमारी उपेक्षा के शिकार रहे और जिन्हें अगर हमने अब भी याद नहीं किया तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं कर सकेगा।
‘यह बड़ी नमकीन मिट्टी है’ आजादी के संघर्ष के इन्हीं विस्मृत पन्नों से गुजरने की एक रोचक और उदात्त गाथा है।”
About The Author
“मुकुल अमलास
जन्मस्थानः मिथिलांचल, बिहार
पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर। देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं तथा वेब पोर्टल पर कविताएँ, कहानियाँ, यात्रा संस्मरण तथा अनेकानेक लेख प्रकाशित तथा पुरस्कृत। दो कविता-संग्रह ‘निःशब्दता के स्वर’ एवं ‘इस निस्सीम ब्रह्माण्ड में’ प्रकाशित। केंद्रीय विद्यालय संगठन की पूर्व अध्यापिका। वर्तमान में नागपुर में निवास एवं सक्रिय रूप से स्वतंत्र लेखन।”






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