प्रेमचंद की प्रवासी तथा विदेशी पात्रों की कहानियाँ
Description
“भूमिका
प्रेमचंद भारतीय जीवन के व्यापक परिदृश्य के लेखक हैं। इस तथ्य को हमारे आलोचकों और विशेष रूप से प्रगतिशील लेखकों ने कभी समझने तथा समझाने की कोशिश नहीं की और प्रेमचंद का एक बहुत ही सीमित कथात्मक संसार पाठकों के सामने रखा, उसकी व्याख्या की और उसी को प्रेमचंद मानने-समझने का दुराग्रह किया। यह प्रगतिशील लेखकों ने राजनीतिक उद्देश्य के लिए किया था, पर किसी महान लेखक को लघु रूप में ही प्रस्तुत करना एक साहित्यिक अपराध ही था। प्रेमचंद की यह सीमित तथा संकुचित साहित्य-मूर्ति अब अपने व्यापक और भव्य रूप में आ गई है और ‘मानसरोवर’ के आठ खंडों की 203 कहानियां अब ‘नया मानसरोवर’ के आठ खंडों में 299 बनकर कालक्रम से (सस्ता साहित्य मंडल प्रकाशन, नई दिल्ली) तथा ‘प्रेमचंद कहानी रचनावली’ (साहित्य अकादमी, नई दिल्ली) के छः खंडों में प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रेमचंद की अभी 3-4 कहानियां नहीं मिली हैं, इस तरह उनकी 300 से अधिक कहानियां हैं और इनमें जीवन का तथा देश-विदेश के पात्रों का कथात्मक व्यापक संसार विद्यमान है। प्रेमचंद के पुत्रों ने। श्रीपतराय ने ‘सरस्वती प्रेस’ से तथा अमृतराय ने ‘हंस प्रकाशन’ से अपने पिता की कहानियों को कुछ विषयों के शीर्षकों के अंर्तगत वर्षों प्रकाशित किया, परंतु फिर भी अनेक विषय अछूते रह गये और प्रेमचंद का एक बड़ा कहानी-संसार कभी संकलित-संगठित रूप में पाठकों तक नहीं पहुंच सका और उनकी कभी चर्चा तथा उनका कभी मूल्यांकन भी नहीं हुआ और उनकी संवेदना का एक महत्वपूर्ण परिदृश्य सदैव ओझल बना रहा। प्रेमचंद की इन गुमशुदा कहानियों तथा पाठकों को व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने के लिए तीन कहानी-संकलनों की योजना बनाई और इसे प्रकाशित करने का दायित्व उठाया ‘हंस’ प्रकाशन ने, और एक प्रकार से ‘हंस’ के रूप में प्रेमचंद खुद अपनी इन अचर्चित तथा लुप्त-सी हो गई कहानियों को एक बार पाठकों के सम्मुख रख रहे हैं, जिससे उन्हें समग्रता में पढ़ने और समझने का सुअवसर मिले।”
About The Author
“जन्मः ।। अक्टूबर, सन् 1938. बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)। शिक्षाः एम.ए. (हिन्दी) प्रथम श्रेणी, पी-एच.डी., डी. लिट्।
विशेषज्ञता क्षेत्रः प्रख्यात साहित्यकार प्रेमचंद के विशेषज्ञ के रूप में राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित।
प्रेमचन्द-साहित्य पर प्रकाशित ग्रंथः कथा सम्राट प्रेमचंद के जीवन, विचार और साहित्य पर विगत 46 वर्षों से अनवरत संलग्न। प्रेमचंद के संदर्भ में परम्परागत मान्यताओं को ध्वस्त कर अकाट्य तों के आधार पर मौलिक शोध और अध्ययन की दिशाओं का संधान।
कमलकिशोर गोयनका
प्रेमचंद साहित्य पर 38 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। इनमें ‘प्रेमचंद के उपन्यासों का शिल्प विधान’, ‘प्रेमचंद अध्ययन की नयी दिशाएँ’, ‘प्रेमचंद विश्वकोश (2) खंडों में)’, ‘प्रेमचंद का अप्राप्य साहित्य’, ‘प्रेमचंद का कहानी दर्शन’, ‘प्रेमचंद नयी दृष्टि नये निष्कर्ष’, ‘प्रेमचंद साहित्य : भारतीय भूमिका’, ‘प्रेमचंद वाद, प्रतिवाद और संवाद’, ‘प्रेमचंद कहानी रचनावली (6 खंडों में)’, ‘नया मानसरोवर (8 खंडों में)’, ‘प्रेमचंद की कहानी यात्रा और भारतीयता’ जैसे अवस्मिरणीय ग्रंथ उल्लेखनीय हैं।
प्रेमचंदोत्तर-साहित्य पर प्रकाशित ग्रंथः प्रेमचंद साहित्य को समर्पित होने के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, मॉरिशस, सूरीनाम, फिजी, नेपाल आदि देशों में रचित अप्रवासी हिन्दी साहित्य के प्रचार, प्रकाशन और पहचान हेतु निरन्तर प्रयासरत्त। इस प्रयास के लिए ठोस एवं व्यावहारिक योजना को मूर्तरूप देने में अहर्निश प्रयत्नशील। प्रेमचंदोत्तर साहित्य पर 24 से अधिक ग्रंथों की रचना। कतिपय प्रमुख ग्रंथ हैं- ‘हिन्दी का प्रवासी साहित्य’, ‘मॉरिशस की हिन्दी कहानियाँ’, ‘अभिमन्यु अनत प्रतिनिधि रचनाएँ’, ‘जगदीश चतुर्वेदी : विवादास्पद रचनाकार’, ‘गाँधी पत्रकारिता के प्रतिमान’, ‘हजारीप्रसाद द्विवेदी :
कुछ संस्मरण’, ‘गाँधी : भाषा-लिपि विचार-कोश’, ‘गाँधी रामकथा विचार-कोश’।
पुरस्कार एवं सम्मानः नथमल भुवालका पुरस्कार (भारतीय भाषा परिषद्, कोलकाता)
साहित्य भूषण पुरस्कार (उ.प्र. हिन्दी संस्थान, लखनऊ) पं. राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार (केंद्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार (साहित्य अकादमी, भोपाल) मैथिलीशरण गुप्त सम्मान (संस्कृति विभाग, म.प्र सरकार) व्यास सम्मान (के. के. फाउंडेशन) हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा दो बार पुरस्कृत और सम्मानित ।”






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