मौन का दर्द (विकासात्मक विमर्श संबंध चयनित कहानियाँ)
Description
मौन का दर्द’ निःशक्तजनों की वास्तविक पीड़ाओं का ऐतिहासिक दस्तावेज है। जीवन के कटु यथार्थ को भोगता हुआ विकलांग समाज, हाशिये के समाजों में भी कहीं बहुत पीछे छूट गया है। प्रस्तुत कहानी संग्रह की कहानियाँ मानवीय संवेदना के दोनों छोरों को छूती हैं। एक ओर तो ‘धुआँ’, ‘गूँगे’, ‘आधा टिकट’, ‘खुदा की देन’ जैसी कहानियाँ समाज की नृशंसतापूर्ण घोर उपेक्षा तथा तिरस्कार को चित्रित करती हैं तो वहीं दूसरी ओर ‘मौन का दर्द’, ‘आप अपने आप में अनुपम और अद्भुत हैं’, ‘गलियारे’ और ‘एक थी शकुन दी’ जैसी कहानियाँ शारीरिक विकलांगता के कारण विकलांग चरित्रों के कमर तोड़ संघर्ष को जीवंत रूप में अभिव्यक्त करती हैं जिसके चलते विकलांग समाज की सामाजिक समायोजन की उत्कट आकांक्षा दृष्टिगत होती है। शिल्प तथा कथ्य दोनों ही दृष्टियों से प्रस्तुत कहानी-संग्रह एक नवीनता का बोध प्रदान करता है साथ ही साथ समवेत मानसिकता को परिवर्तन हेतु चुनौती भी प्रेषित करता है
About The Author
“कुसुमलता मलिक
सृजनात्मक कृतियाँ- ‘कस्तूरी’, ‘पांखुरी’, ‘सृष्टि’ (काव्य संग्रह), ‘कही अनकही’ (कहानी संग्रह), ‘उपहार’, ‘निराकृति’ (संपादित कहानी संग्रह), ‘कारा कुन्ती की’, ‘लुई की सुई’ (नाटक)
आलोचनात्मक कृतियाँ- ‘नई रंग चेतना एवं बकरी’, ‘स्वातंत्र्योत्तर पारंपरिक रंग प्रयोग’, ‘हिन्दी रंग आंदोलन व हबीब तनवीर’, ‘बोध के विविध रंग’, ‘अंतिम जन तकः विकलांगजन अधिकार्जन चेतना के पुरोधा श्री संतोष कुमार रूंगटा’ तथा ‘गप्प का गुलमोहर : मनोहर श्याम जोशी (संपादित)’
संपादित पत्र-पत्रिकाएँ- ‘स्पर्शसेतु’ (द्वैमासिक हिन्दी ब्रेल पत्रिका), The Touch’ (bi-monthly English Braille magazine), ‘ब्रेल ज्ञानोदय’ (प्रतियोगी परीक्षाओं की मासिक पत्रिका)
विविध पत्र पत्रिकाओं में अनेक लेख प्रकाशित तथा आकाशवाणी के विभिन्न कार्यक्रमों का संयोजन व प्रस्तुतिकरण।
प्रोफेसर मलिक अकादमिक तथा सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है। वर्तमान में राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ, भारत (National Federation Of The Blind, India) की अध्यक्ष, ब्रेल कांउसिल ऑफ इंडिया की विश्वविद्यालयीय प्रतिनिधि सदस्य, वर्ल्ड ब्लाइंड यूनियन महिला समिति की सदस्य, माराकेश ट्रिट्टी के कार्यान्वयन हेतु दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की संयोजक व अन्य बहुत-सी संस्थाओं में अपनी अकादमिक एवं वैचारिक क्षमता का भरपूर लाभ पहुँचाने वाली कर्मठ कार्यकर्तृ हैं।
संप्रति- हिन्दी विभाग में वरिष्ठ प्रोफेसर के पद पर कार्यरत”






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