तू या मैं
Description
अक्षय छत में जाकर चारपाई में औंधा लेटा है। प्रीति को हर आहट की खबर हो जाती है। वह अम्माजी के पास पहुंच चुकी है। अक्षय को न पाकर इधर उधर ताँकझाँक करने लगती है तो अम्माजी कहती हैं कि अक्षय अभी छत में गया है, तू थोड़ी देर में आ जाना। वह अच्छा कहकर वापस जाने के लिए निकली पर कुछ सोचकर आधे रास्ते से घूमकर सीधे छत की सीढ़ियां चढ़ जाती है। छत पर पहुँच कर थोड़ी देर दरवाजे पर खड़ी खड़ी ही देखती रहती है। अक्षय चारपाई पर निश्चल पड़ा है, यह देखकर दबे पाँव उस तक पहुँचती है। थोड़ा इन्तजार कर, अक्षय के कान तक झुक कर धीरे से कहती है देखो कौन आया है। अक्षय अपने विचारों में डूबा, उसे बिना देखे जवाब देता है – जिस काम से आई हो वो करके चली जाओ।
About The Author
होटल में वेटर ने बताया कि थोड़ी दूर पर ही एक प्राचीन मन्दिर है, उसकी बहुत मान्यता है। उसे देखने जानकी और अक्षय चल पड़े। आज पेपर जल्दी खत्म कर लिया सोफिया ने तो वह सीधे होटल आ गई। उसके दिमाग में यही चल रहा था कि माँ और अंकल कहीं बाहर घूम ही न रहे हों। रिसेप्शन से उसने चाभी के लिए पूछा तो उसे जवाब मिला कि ऊपर कमरा खुला है। वह तेजी से सीढियां चढ़कर ऊपर पहुँची। इससे पहले सोफिया अपने कमरे की घण्टी बजाती, दरवाजे के अपारदर्शी शीशे से अन्दर दो आकृतियां बहुत करीब-करीब, लगभग आलिंगनबद्ध सी नजर आ रही थी।






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