XStore theme
0 Days
0 Hours
0 Mins
0 Secs

No products in the cart.

वातायन (कहानी संग्रह)

495.00

🔥 2 items sold in last 7 days
21 people are viewing this product right now

Author Name – डॉ. नरेश मिश्रा
गुरुवर डॉ. नरेश मिश्र भाषा और साहित्य के सुधी विद्वान हैं। आपके सृजन में आपके सहज, सरल और तरल व्यक्तित्व की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। ‘वातायन’ आपका सद्यः प्रकाशित कहानी-संग्रह है। इस संग्रह की कहानियों के यथार्थ का गहरा रंग पाठक को जीवंत परिवेश में पहुँचा देता है। कहानी के अधिकांश पात्र आत्म-केंद्रित और स्वार्थ में लिप्त होकर समकालीन आधुनिक मानसिकता को उजागर करते हैं।

In stock

or
SKU: HSP0179 Categories:
Estimated delivery:May 19, 2026 - May 21, 2026

वातायन (कहानी संग्रह)

Description

“गुरुवर डॉ. नरेश मिश्र भाषा और साहित्य के सुधी विद्वान हैं। आपके सृजन में आपके सहज, सरल और तरल व्यक्तित्व की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। ‘वातायन’ आपका सद्यः प्रकाशित कहानी-संग्रह है। इस संग्रह की कहानियों के यथार्थ का गहरा रंग पाठक को जीवंत परिवेश में पहुँचा देता है। कहानी के अधिकांश पात्र आत्म-केंद्रित और स्वार्थ में लिप्त होकर समकालीन आधुनिक मानसिकता को उजागर करते हैं। कहानी संग्रह में पारिवारिक विघटन, सहज संबंधों में बिखराव, अर्थ-लोलुपता आदि से व्यक्ति घुटन में त्रस्त दिखाई देता है। यत्र-तत्र सप्रयास और सद्भाव से जीवन पथ पर आलोक का विस्तार भी होता है। डॉ. मिश्र की कहानियाँ यथार्थवादी हैं। इसलिए चित्रांकन में सहजता और स्वाभाविकता का हृदयस्पर्शी भाव प्रवाह है। कहानियों की भाषा सरल और सहज होने से पूर्ण बोधगम्य और संप्रेषणीय है।

मेरी हार्दिक कामना है कि डॉ. मिश्र जी स्वस्थ-प्रसन्न रह कर सरस्वती की सतत साधना करते रहें।”

About the Author

“गुरुवर डॉ. नरेश मिश्र चर्चित भाषाविद् और सुधी साहित्यकार हैं। आपकी प्रथम रचना-निंबध है- ‘काँटें क्या कहते हैं?”” आपसे चर्चा करके स्पष्ट हुआ है कि सन् 1971 में भाषाविद् डॉ. भोलानाथ तिवारी का आशीर्वाद मिला, तो आपने भाषा-चिंतन को अपना लक्ष्य बना लिया।

‘वातायन’ कहानी-संग्रह में वर्तमान समाज की विभिन्न परिस्थितियों में उलझन भरी मानसिकता; टूटते-बिखरते संबंधों; स्वार्थ-अहं, ईर्ष्या-द्वेष; और लोलुपता में घायल होती मानवीयता का चित्रण कर सन्मार्ग पर आने का संकेत किया गया है। संग्रह में सर्वाधिक भावानात्मक प्रस्तुति शिक्षा जगत की है।

संग्रह की अधिकांश कहानियाँ यथार्थ धरातल का प्रतिनिधित्व करती हैं। अनुकूल और प्रभावी अभिव्यक्ति के लिए कल्पना का रंग भरा गया है।

मेरी हार्दिक कामना है कि गुरुवर डॉ. मिश्र स्वस्थ-प्रसन्न रहकर वीणा पाणि सरस्वती के भंडार में अभिवृद्धि करते रहें।”

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “वातायन (कहानी संग्रह)”

Your email address will not be published. Required fields are marked

Featured Products