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मुक्ति पथ (कहानी संग्रह)

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Author Name – डॉ. सुरेश सिंह यादव
डॉ. सुरेश सिंह यादव की कहानियों को पढ़ने से यह सहज ही समझा जा सकता है कि तमाम सन्दर्भों से लेखक का वास्ता पड़ा होगा या फिर इन सभी चीजों को काफी नजदीक से जाना-समझा होगा। क्योंकि इसके अभाव में इस तरह लिख पाना आसान नहीं होता । उनकी कहानियाँ दम तोड़ रही मानवता, विलुप्त हो रहे सामाजिक सद्भाव और संवेदनशीलता को सचेत होकर व्यक्त करती हैं। यही कारण है कि ये सभी कहानियाँ पाठक के मन को भीतर तक छूती हुई प्रतीत होती हैं।

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मुक्ति पथ (कहानी संग्रह)

Description

डॉ. सुरेश सिंह यादव की कहानियों को पढ़ने से यह सहज ही समझा जा सकता है कि तमाम सन्दर्भों से लेखक का वास्ता पड़ा होगा या फिर इन सभी चीजों को काफी नजदीक से जाना-समझा होगा। क्योंकि इसके अभाव में इस तरह लिख पाना आसान नहीं होता ।… उनकी कहानियाँ दम तोड़ रही मानवता, विलुप्त हो रहे सामाजिक सद्भाव और संवेदनशीलता को सचेत होकर व्यक्त करती हैं। यही कारण है कि ये सभी कहानियाँ पाठक के मन को भीतर तक छूती हुई प्रतीत होती हैं।””

‘दैनिक जागरण’ राष्ट्रीय संस्करण

“”डॉ. सुरेश की कहानियों में गाँव की मिट्टी की सुगन्ध के साथ ही, शहर और कस्बे का बेहतर तालमेल है। इन कहानियों के सभी पात्र प्रासंगिक हैं, जो हमारे आस-पास सहसा ही मिल जाते हैं।””

दैनिक ‘अमर उजाला’

“”कहानी ऐसी होनी चाहिए जो अच्छी लगे और उसमें कहानीपन हो। सुरेश सिंह यादव अपनी कृतियों में इसका ध्यान रखते हैं। सुरेश ने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया है, जिससे उनके पास पर्याप्त अनुभव है।””

डॉ. पी.एन. सिंह

प्रखर चिन्तक एवं वरिष्ठ आलोचक

“”डॉ. सुरेश सिंह यादव की कहानियाँ मनुष्य को केन्द्र में रखकर लिखी गयी हैं। वे मानव जीवन के अन्तर्विरोधों और विसंगतियों को उजागर करते हुए पाठकों से कुछ कहती हैं। कहानियाँ सहज, सरस, बोधगम्य हैं और मन को स्पर्श करती हैं।

About the Author

सुरेश सिंह यादव के पात्र प्रासंगिक होते हैं जो यत्र-तत्र मिल जायेंगे। इनकी कहानियों को किसी भी ऐंगल से देखकर समाज के यथार्थ को समझा जा सकता है।… वह दिन दूर नहीं जब डॉ. सुरेश सिंह यादव का रचना-कर्म पूरे हिन्दी समाज में पहुँचेगा।””

रामकीर्ति शुक्ल

आलोचक, से.नि.प्रो., बी.एच.यू.

“”डॉ. सुरेश सिंह यादव के ‘अपनी धरती – अपने लोग’ कहानी-संग्रह की कहानियों को पढ़ने और उनके मूल तत्त्व को समझने का सुअवसर मुझे मिला है। आप समाज की दुखती नस को पकड़कर अपनी संवेदना और अनुभव को शब्दों की चाशनी में पागने का सफल प्रयास सदैव करते रहते हैं। इस डिजिटल युग में किसी से साहित्यिक सम्पर्क करने का कार्य दुरूह नहीं है। मैं आपके सिद्ध साहित्यिक व्यंग्य लेखन से भी पूर्ण परिचित हूँ। आप कहानी, उपन्यास के सुपरिचित और सतर्क रचनाकार हैं। हिन्दी साहित्य के लिए आपका अतुलनीय सहयोग सराहनीय और स्तुत्य है।

शिवानन्द सिंह ‘सहयोगी’ नव गीतकार, मेरठ

“”सुरेश सिंह यादव एक संवेदनशील कहानीकार हैं। उनकी कहानियाँ लोक-मन को छूती हैं। सुरेश उस परिवर्तनकामी चेतना से लैस हैं जो एक रचनाकार के लिए जरूरी होती है। वे व्यक्ति से लेकर सत्ता-व्यवस्था की असंवेदनशीलता और क्रूरता को पहचानते हैं तथा विकास और मूल्य विरोधी प्रवृत्तियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं। उनकी कहानियों का यही सबसे मजबूत पक्ष है।

प्रो. चन्द्रदेव यादव”

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