पूर्ण पुरुष
Description
“पूनम सिंह की ‘पूर्ण पुरुष’ कहानी संग्रह प्रकाशित होने वाली है। इसकी सभी कहानियाँ अपने आप में एक से बढ़कर एक हैं। इसमें आज के बदलते समाज में हो रहे परिवर्तन की स्पष्ट झलक है। यह सामाजिक परिवेश को परिलक्षित करती हैं। निःसंदेह पाठक स्वयं एक के बाद एक कहानी पढ़ने के लिए बाध्य हो जाता है।
कहानी ‘अपराजिता’, ‘पूर्ण पुरुष’, ‘मंजिल या पड़ाव’ और ‘को काहू को नाहीं’ पाठक के मन पर विशेष छाप छोड़ती हैं। इनमें यह संदेश बहुत स्पष्टता से है कि आज के बदलते परिवेश में एक उम्र के बाद परिवार में सामंजस्य बैठाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि स्कूल के पाठ्यक्रमों से नैतिक शिक्षा का लोप हो गया है। इंटरनेट के पोस्ट स्वार्थी होना सीखा रहे हैं। बच्चों के कोमल मन पर बहुत ही गहरा दुष्प्रभाव पड़ रहा है। अपने गुरुजनों पर से, अपने घर के बड़ों के प्रति आदर, सम्मान और श्रद्धा खत्म होती जा रही है। कभी परिस्थितियाँ भी सामंजस्य नहीं बैठने देतीं।”






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