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Hindi Sahityaitihas Ka Vaikalpik Pariprekshya

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Author Name – Prof Sudha Singh, Jagdishwar Chaturvedi
आज हमारा समाज परवर्ती पूँजीवाद की अवस्था में पहुँच चुका है। स्त्रियों के लिए यह अवस्था सबसे ज्यादा ख़तरनाक और बर्बर है।

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हिन्दी साहित्यैतिहास का वैकल्पिक परिप्रेक्ष्य- Hindi Sahityaitihas Ka Vaikalpik Pariprekshya

Description

आज हमारा समाज परवर्ती पूँजीवाद की अवस्था में पहुँच चुका है। स्त्रियों के लिए यह अवस्था सबसे ज्यादा ख़तरनाक और बर्बर है। मानव सभ्यता के विकास के क्रम में स्त्री-बर्बरता के जितने भी मानक रचे गये थे, वे सब टूट रहे हैं। आज उनकी जगह ज्यादा बर्बर रूपों ने ले ली है। आज सभ्यता के मानक भी तेजी से टूट रहे हैं। सभ्यता के मानक जब भी टूटते हैं, स्त्रियों को नई विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि हमें सभ्यता को बचाने की जंग के साथ स्त्री के संघर्षों को जोड़ना होगा। परवर्ती पूँजीवाद को ‘पूँजीवाद की नग्न तानाशाही’ कह सकते हैं। पूँजी के नग्नतम और क्रूर हाथों से जिन दो समूहों को सबसे ज्यादा तबाही का सामना करना पड़ रहा है, उनमें पहले स्त्रियाँ हैं और दूसरे नंबर पर मज़दूर वर्ग है। परवर्ती पूँजीवाद इन दोनों समूहों-वर्गों की अब तक की समस्त उपलब्धियों को नष्ट करने पर आमादा है। स्त्री-अस्मिता की जंग का पहला स्तर है। स्त्री-आंदोलन और स्त्री जाति की अब तक की उपलब्धियों की हर कीमत पर रक्षा करना, इनका विस्तार करना। साथ ही, स्त्री-अस्मिता के नए मसलों, सवालों को स्त्री-आंदोलन और वैचारिक संघर्ष के केन्द्र में लाना।

About The Author

“जगदीश्वर चतुर्वेदी मथुरा में 1957 में जन्मा आरंभ में 13 वर्षों तक सिद्धांत ज्यौतिषशाख का अध्ययना आरंभ में ज्यौतिषशास्त्र पर दो पुस्तकें प्रकाशिता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से सिद्धांत ज्यौतिषशाख (1979), साहित्यालोचना, मीडिया और सोशल मीडिया पर सत्तर से अधिक पुस्तके प्रकाशित। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से सिद्धांत ज्यौतिषशास्र (1979), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से हिंदी में एम.ए. (1981), एमफिल, (1982) (आपातकालीन हिंदी कविता और नागार्जुन), पीएच डी. (स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता की मार्कसवादी समीक्षा का मूल्याकन) (1986), कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सन् 1989 से 2016 तक
जगदीश्वर चतुर्वेदी अध्यापन कार्य, तीन बार विभागाध्यक्ष।

साहित्यालोचना और मीडिया पर 58 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सन् 1989 में प्रवक्ता। सन् 1993 में रीडर और सन 2001 में प्रोफेसर पद पर नियुक्ति। सन् 2016 में रिटायर।

 प्रकाशित कुछ प्रमुख पुस्तके उबेर्तों इको चिरशाख साहित्य और मीडिया (2012), मीडिया समग्र 11 खड़ों में (2013), साहित्य का इतिहास दर्शन (2013), डिजिटल कैपीटलिज्म, फेसबुक संस्कृति और मानवाधिकार (2014). इंटरनेट, साहित्यालोचना और जनतंत्र (2014), नामवर सिंह और समीक्षा के सीमात (2016), रामविलास शर्मा परवतीं पूंजीवाद और साहित्येतिहास की समस्याएं (2017), उत्तर आधुनिकतावाद (2004), तिब्बत दमन और मीडिया (2009), नंदीग्राम, मीडिया और भूमंडलीकरण (2008), स्रीवादी साहित्य विमर्श (2000), मार्कसवादी साहित्यालोचना की। समस्याएं, साइबर परिप्रेक्ष्य में हिंदी संस्कृति, उत्तर आधुनिकतावाद और विचारधारा, आधुनिकतावाद और विचारधारा, लेखक विश्वदृष्टि और संस्कृति।

 जन्म कोलकाता, प. बंगाला कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम. हिंदी (स्वर्ण पदक), सुप्रसिद्ध आलोचक रामविलास शर्मा के आलोचना कमी पर पीएच.डी। श्री शिक्षायतन महाविद्यालय, कलकत्ता विश्वविद्यालय से। व्याख्याता (हिंदी) की नौकरी का आरंभ। तत्पश्चात विच्चभारती विश्वविद्यालय, प. बंगाल में हिन्दी व्याख्याता के पद पर लगभग पांच वर्षों तक अध्यापन। सन् 2004 में, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में रीडर (मीडिया, जर्नलिज्म और अनुवाद) पद पर नियुक्तिा सन् 2010 से हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत। सन् 2010-12 तक आईसीसीआर चेयर पर अश्गाबात, तुर्कमेनिस्तान में हिंदी भाषा और साहित्य की संस्थापक विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्य।

सुधा सिंह
आलोचना, मीडिया, पत्रकारिता और अनुवाद के क्षेत्र में अनेक पुस्तकें प्रकाशित। बांग्ला से। हिंदी में राससुंदरी दासी की आत्मकथा का ‘मेरा जीवन’ नाम से अनुवाद। अंग्रेजी से हिंदी में। ‘जनमाध्यम’, ‘जनतंत्र जनमाध्यम और वर्तमान संकटा, “”सूचना समाज”” पुस्तकों का संपादन और अनुवाद। महत्वपूर्ण आलोचना पुस्तकों में ‘आधुनिक काल और रामविलास शर्मा, ज्ञान का स्रीवादी पाठ’, ‘जनमाध्यम सैद्धांतिकी’, ‘सी संदर्भ में महादेवी’, ‘स्त्री कथा’, “”स्त्री अस्मिताः साहित्य और विचारधारा’, ‘मध्यकालीन साहित्य विमर्श (सं), ‘मीडिया प्राच्यवाद और वर्चुअल यथार्थ’, ‘स्वाधीनता संग्राम हिंदी प्रेस और सी का वैकल्पिक क्षेत्र’, ‘वैकल्पिक मीडिया लोकतंत्र और नॉम चोमस्की।”

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