पाखंड के इस दौर में (व्यंग्य संग्रह) - Paakhand ke is daur mein (Vyangy Sangrah)
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“पाखण्ड के इस…
‘पाखण्ड के इस दौर में’ शीर्षक इस व्यंग्य संकलन के पहले डॉ. गंगाधर पटेल की पाँच व्यंग्य कृतियाँ प्रकाश में आ चुकी हैं, जिसमें उन्होंने समाज की आत्मा तक में समा चुकी गहन विद्रूपताओं की पड़ताल की है। इन पुस्तकों को पाठकों से भरपूर सराहना भी मिली है। इस व्यंग्य कृति में भी उन्होंने समाज में व्याप्त धार्मिक अंधविश्वास, सर्वहारा वर्ग का घोर शोषण, व्यभिचार, राजनैतिक अधोपतन, नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार सहित अनेकानेक विषयों पर करारा व्यंग्य किया है, जिसे पढक़र मन एक बारगी विक्षोभ और करुणा से भर आता है।
डॉ. पटेल एक मननशील लेखक और गंभीर पाठक भी हैं। वह खूब पढ़ते हैं और कम लिखते हैं। हरिशंकर परसाई उनके प्रिय व्यंग्यकार रहे हैं जिनके कृतित्व पर उन्होंने शोध कार्य भी किया है, इस नाते यह कहा जा सकता है कि व्यंग्य की उपादेयता को वह भली प्रकार समझते हैं। उन्होंने व्यंग्य लेखन की एक अनूठी पद्यात्मक शैली विकसित की है। वह दोहा शैली में भी व्यंग्य लिखते हैं उनकी यह विशेषता उनके समकालीन व्यंग्य लेखकों से उन्हें अलग और विशिष्ट बनाती है। संकलित व्यंग्य, कथ्य की दृष्टि से सर्वथा नवीन और सामायिक हैं। व्यंग्य की भाषा, आमफहम है और उसकी शैली तुकांत है, जिससे वह पाठकों पर अपना गहरा असर छोड़ती हैं।
यह व्यंग्य संग्रह अपने सृजन के उद्देश्य में सफल होकर साहित्य प्रेमियों के लिये पठनीय और उपयोगी साबित होगा ऐसा मेरा विश्वास है।”






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