आलोचना का जनतंत्र
Description
“देश के श्रेष्ठतम युवा कवि चिंतकों में लहरी राम मीणा आज अपनी जगह बना चुके हैं।
‘आलोचना का जनतंत्र’ पुस्तक उन की विचार संपदा का अनोखा उदाहरण है। इसमें विभिन्न अवसरों पर दिए गए व्याख्यानों एवं पत्रिकाओं के लिए लिखे गए लेख भी शामिल हैं। समाज, साहित्य, संस्कृति, आलोचना, विचार और साहित्य के अन्य प्रश्नों पर केंद्रित उनके विचार ध्यानपूर्वक पढ़े जाने की मांग करते हैं। परदुखकातर का भाव रखने वाले एवं सर्वसमावेशी विवेक के साथ चिंतन करने वाले लहरी राम मीणा के ये लेख पाठक को तात्विक दृष्टि से समृद्ध करते हैं।
लहरी राम मीणा का मानना है कि आलोचना कोई एक विधि नहीं है, आलोचना के प्रतिमान और उसकी वैचारिकी आलोचक के परिवेश और उसके अनवरत अध्ययन की समझ के आधार पर सृजित होती है। इसलिए हर सृजनात्मक रचना पर आलोचक की एक दृष्टि का होना बहुत जरूरी है। आलोचना का कार्य ही किसी उलझी हुई गांठ को सुलझाना या खोलना होता है। इसके उपरांत ही भविष्य के पाठकों के लिए भी चिंतन का नया द्वार खुलने की उम्मीद रहती है। आलोचना किसी विचारधारा या वाद में बंधी हुई विद्या नहीं होती है बल्कि वह तो आलोचक के स्वविवेक के आधार पर सृजित होकर एक नए रूप और आकार के साथ पाठकों के सामने आती है और अपना विस्तार का दायरा बढ़ाती हैं।
लहरी राम मीणा के साहित्य में अतीत से लेकर वर्तमान यथार्थ तक यह आलोचकीय चेतना व्याप्त है। ‘आलोचना का जनतंत्र’ के ये लेख जीवन, समाज, राष्ट्र और संस्कृति के कई आयामों को समेटते हुए साहित्य और आलोचना के अनेक पक्षों को उद्घाटित करते हैं।
प्रकाशक”
About The Author
“डॉ. लहरी राम मीणा
(जन्म: 1985, गाँव-रामपुरा उर्फ़ बान्यावाला, जयपुर)
शिक्षा: एम.फिल., पी एच.डी., दिल्ली विश्वविद्यालय । आप प्रतिष्ठित युवा आलोचक, कवि एवं रंग समीक्षक हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकें हैं-साहित्य का रंगचिंतन (2015 शिल्पायन प्रकाशन, नई दिल्ली), भारतेंदुः एक नई दृष्टि (2015 स्वराज प्रकाशन, नई दिल्ली), समकालीन साहित्य दृष्टि (2018 यश प्रकाशन, नई दिल्ली), जिस उम्मीद से निकला (2020, भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली), लक्ष्मीनारायण लाल विनिबंध (2024 साहित्य अकादमी, नई दिल्ली), सृजन के विविध रूप और आलोचना (2024 वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, प्रकाश्य) जिस उम्मीद से निकला काव्य संग्रह का अवधी, उर्दू एवं राजस्थानी भाषा में अनुवाद हो चुका है। नाटक एवं रंगमंच में आप सक्रिय। आप राजस्थान साहित्य अकादमी का देवराज उपाध्याय आलोचना पुरस्कार, नान्दी सेवा न्यास वाराणसी का युवा सृजन शिखर पुरस्कार एवं हिंदुस्थानी न्यूज़ एजेंसी लखनऊ द्वारा भारतीय भाषा सम्मान सहित अनेक सम्मानों एवं पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।
संप्रति : इन दिनों काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत”






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