अज्ञेय के काव्य में आत्मसंघर्ष - Agyey ke kaavy mein aatmasangharsh
Description
पुस्तक परिचय
“”अज्ञेय के काव्य में (आत्मसंघर्ष)”” नामक पुस्तक प्रस्तुत करते हुए हमें बहुत खुशी हो रही हैं। इस पुस्तक में अज्ञेय की उन कविताओं को दिखाने का प्रयास किया गया है, जहाँ अज्ञेय (आत्मसंघर्ष) करते दिखाई पड़ रहे हैं। अज्ञेय की (कविताओं) के द्वारा संसार के हरेक प्राणी को आत्मसंघर्ष अर्थात् खुद के अंदर संघर्ष करते हुए देखा जा सकता है। प्रत्येक प्राणी किसी न किसी वस्तु के लिए संघर्षरत हैं। पुस्तक में अज्ञेय की कविताओं के माध्यम से उन सभी संघर्ष करते प्राणी को दिखाया गया है। अज्ञेय की कविताओं को आधार बनाना इसलिए मुझे अच्छा लगा क्योंकि अज्ञेय के काव्य आज की युवा पीढ़ी के लिए सटीक बैठता है। मुझे विश्वास है कि समाज और साहित्य के प्रति नवीन दृष्टिकोण रखने वाले प्रेमी इस पुस्तक को अपने हृदय में जगह देंगे।
डॉ० भरत कुमार
About The Author
नाम : डॉ० भरत कुमार
जन्मतिथि : 28 जुलाई, 1989
पिता : श्री जवाहर प्रसाद
माता : श्रीमती अनिता देवी
शिक्षा : स्नातकोत्तर (हिंदी), बी०एड०, पी-एच०डी०
सम्पर्क : ग्रा० व पो० – बड़ी






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