बंजर होती संस्कृति
Description
“संस्कारों और मूल्यों का पाथेय सुमार्ग का वरण गंतव्य को किंचित सरल व साध्य बना देते हैं। आघातों-प्रतिघातों का क्रम, जीवन-पथ में मिलते जन्झावातों, उठते गिरते घने धूल-कणों संग उखड़ी नियंत्रणहीन सामग्रियों के आतंक के आवरण में लिपटे मिलते दिशाहीन बवंडर, जीवन को भयाक्रांत व अल्पकाल को विचलित कर देते हैं, जीवन कदाचित् व्यथाओं विपदाओं आतंकों से थोड़े चिर को सहम जाता है किन्तु सृजन, सृष्टि के आयामों का निषेध नहीं करता।
मानवीय मूल्यों के निर्धारण में देश, काल, परिवेश की अनुशंसा अवांछित नहीं होती, स्वीकार्य व सरोकारी होती है, इनका तादात्म्य जीवन को क्षमा, प्रेम, करुणा, धैर्य का तत्त्व देता है, जिनसे लौकिक और पारलौकिक पक्षों का अपनी क्षमतानुसार मनुष्य अन्वेषण विजण व विश्लेषण कर अपने जीवन काल-खण्ड में अपनी यात्रा तय करता है। अधिकतम शुभ की प्राप्ति यथेष्ट पथ व सुचिंतन का उद्योग वनता है।
मानवीय मूल्यों की अवधारणा का विचलन पथ, पथिक ही नहीं, देश, परिवेश, समाज संस्कृति को एकल नहीं समग्र दिशा से प्रभावित ही नहीं वरन् पीड़ित करता है। अमानवीय लिप्सा, अपारदर्शिता, उर-संकुचन पक्षपात, आक्रोश, प्रतिशोध के कारक वन, जनमानस में विक्षोभ उत्पन्न करते हैं। जिससे नकारात्मक ऊर्जा का अवांछित विस्तार होता है। परिणामतः भौतिकता, आध्यात्मिकता का चरित्र व आवरण छद्म, षड्यंत्र अहंकार, प्रमाद, अभिमान में समाहित हो जाता है। संस्कृतियों, सभ्यताओं का पावन आत्मिक कलेवर”
About The Author
“उदय वीर सिंह (कवि एवं लेखक)
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
प्रकाशित रचनाएँ-
काव्य विधा
1. उदय-शिखर (काव्य-संग्रह),
2. प्रीतम (काव्य-खंड),
3. मधुपर्ण (काव्य-संग्रह)
4. तनया (काव्य-खंड),
5. निहितार्थ (काव्य-संग्रह),
6. वाणी-संजीवन (काव्य-खंड),
7. टूटे सितारों की उड़ान (संयुक्त सृजन)।
गद्य-विधा
1. समिधा (कहानी-संग्रह)
2. निर्वाण (कहानी संग्रह)
3. साक्ष्य (कहानी संग्रह)
सम्मान
काव्य-भारती, साहित्य भारती, साहित्य सरिता, सृजन-सम्मान, साहित्य श्री सम्मान, सहित अनेक अन्य प्रतिष्ठित सम्मान।
देश व विदेश में कहानी-पाठ काव्य-पाठ व व्याख्यान, अनेकों प्रतिष्ठित पत्र, पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
राज्य-सभा चैनल सहित रेडियो व टी वी चैनल्स पर प्रस्तुति।”






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