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भटकती जिंदगी का नाटक (कहानी-संग्रह)

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Author Name – प्रकाश मनु
विष्णु खरे को याद करते हुए, जिनकी असाधारण जिद ने ‘भटकती जिंदगी का नाटक’ कहानी लिखवा ली, और फिर उनके ही संपादन में छपे ‘इंद्रप्रस्थ भारती’ के कहानी विशेषांक में छपकर, बहुत चर्चित हुई…”

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भटकती जिंदगी का नाटक (कहानी-संग्रह)

Description

“विष्णु खरे को याद करते हुए, जिनकी असाधारण जिद ने ‘भटकती जिंदगी का नाटक’ कहानी लिखवा ली, और फिर उनके ही संपादन में छपे ‘इंद्रप्रस्थ भारती’ के कहानी विशेषांक में छपकर, बहुत चर्चित हुई…”

About the Author

“प्रकाश मनु

सुप्रसिद्ध साहित्यकार, संपादक और बच्चों के प्रिय लेखक। मूल नाम: चंद्रप्रकाश

विग।

जन्म : 12 मई, 1950 को शिकोहाबाद, उत्तर प्रदेश में।

कुछ वर्ष प्राध्यापक रहे। फिर लगभग ढाई दशकों तक बच्चों की लोकप्रिय पत्रिका ‘नंदन’ का संपादन। अब स्वतंत्र लेखन। प्रसिद्ध साहित्यकारों के आत्मीय संस्मरण, आत्मकया तथा बाल साहित्य से जुड़ी कुछ बड़ी योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

उपन्यास : यह जो दिल्ली है, कथा सर्कस, पापा के जाने के बाद।

कहानियाँ : अंकल को विश नहीं करोगे, अरुंधती उदास है, जिंदगीनामा एक जीनियस का, तुम कहाँ हो नवीन भाई, मिसेज मजूमदार, मिनी बस, 21 श्रेष्ठ कहानियाँ, प्रकाश मनु की लोकप्रिय कहानियाँ, तुम याद आओगे लीलाराम, मेरी कथायात्रा: प्रकाश मनु ।

कविता : एक और प्रार्थना, छूटता हुआ घर, कविता और कविता के बीच।

आत्मकथा : मेरी आत्मकथा रास्ते और पगडंडियाँ (पहला खंड)।

हिंदी के दिग्गज साहित्यकारों के लंबे, अनौपचारिक इंटरव्यूज की किताब ‘मुलाकात’ बहुचर्चित रही। ‘पादो का कारवों’ में हिंदी के शीर्ष साहित्कारों के संस्मरण। देवेंद्र सत्यार्थी, रामविलास शर्मा, शैलेश मटियानी, रामदरश मिश्र तथा विष्णु खरे के व्यक्तित्व और साहित्यिक अवदान पर गंभीर मूल्यांकनपरक पुस्तकें। साहित्य अकादेमी के लिए देवेंद्र सत्यार्थी और विष्णु प्रभाकर पर मोनोग्राफ। सत्यार्थी जी की संपूर्ण जीवनी ‘देवेंद्र सत्यार्थी : एक सफरनामा’ प्रकाशन विभाग से प्रकाशित। बाल साहित्य की विभिन्न विधाओं में डेढ़ सौ से अधिक पुस्तकें।

हिंदी में बाल साहित्य का पहला बृहत् इतिहास ‘हिंदी बाल साहित्य का इतिहास’ लिखा। इसके अलावा ‘हिंदी बाल कविता का इतिहास’, ‘हिंदी बाल साहित्य के शिखर व्यक्तित्व’, ‘हिंदी बाल साहित्य के निर्माता’ और ‘हिंदी बाल साहित्य : नई चुनौतियों और संभावनाएँ’ पुस्तकें भी। संस्मरण, साक्षात्कार, आलोचना और साहित्येतिहास से संबंधित विचारोत्तेजक लेखन। कई महत्त्वपूर्ण संपादित पुस्तकें और संचयन भी। कई पुस्तकों का पंजाबी, सिंधी, मराठी, गुजराती, कन्नड़ समेत अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद।

पुरस्कार : बाल उपन्यास ‘एक था ठुनदुनिया’ पर साहित्य अकादेमी का पहला बाल साहित्य पुरस्कार। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के ‘बाल साहित्य भारती पुरस्कार’ और हिंदी अकादेमी के ‘साहित्यकार सम्मान’ से सम्मानित। कविता-संग्रह ‘छूटता हुआ घर’ पर प्रथम गिरिजाकुमार माथुर स्मृति पुरस्कार।”

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