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एक भटकी हुई मुलाक़ात

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Author Name – रामदरश मिश्र
एक भटकी हुई मुलाकात’ मिश्र जी की विशिष्ट कहानियों का महत्त्वपूर्ण संकलन है। मिश्र जी की कहानी-यात्रा छठे दशक में शुरू तो हो गई थी किन्तु उसे सघनता और निरंतरता सातवें दशक में प्राप्त हुई। छठे-सातवें दशक में अनेक छोटे-बड़े वाद (आन्दोलन नहीं) खलबलाये हुए थे और उनसे > जुड़ कर साहित्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की आपाधापी मची हुई थी। । उन वादों की निरर्थकता की पहचान कर मिश्र जी उनमें से किसी से नहीं जुड़े। ये तो अपने समय की चेतना के प्रवाह के साथ स्वतः चलते रहे।

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एक भटकी हुई मुलाक़ात

Description

“एक भटकी हुई मुलाकात’ मिश्र जी की विशिष्ट कहानियों का महत्त्वपूर्ण संकलन है। मिश्र जी की कहानी-यात्रा छठे दशक में शुरू तो हो गई थी किन्तु उसे सघनता और निरंतरता सातवें दशक में प्राप्त हुई। छठे-सातवें दशक में अनेक छोटे-बड़े वाद (आन्दोलन नहीं) खलबलाये हुए थे और उनसे > जुड़ कर साहित्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की आपाधापी मची हुई थी। । उन वादों की निरर्थकता की पहचान कर मिश्र जी उनमें से किसी से नहीं जुड़े। ये तो अपने समय की चेतना के प्रवाह के साथ स्वतः चलते रहे।

मिश्र जी के समस्त लेखन की धुरी है अनुभव। ये प्रगतिशील दृष्टि से अनुभवों को रच कर एक ऐसा संसार खड़ा करते हैं जो पाठकों को अपना संसार लगता है। मिश्र जी की जीवन-यात्रा गाँव से लेकर महानगर तक है। इन्होंने गाँव को तो आर-पार जिया ही, शहर को भी उतनी गहराई से रजिया जितनी गहराई से जीना संभव हो सका। अतः इनकी कहानियों में गाँव, नगर और महानगर के जीवन-यथार्थ के विविध आयाम प्रभावशाली ढंग से रूपायित हुए हैं। इन कहानियों में अंतर्जगत और बहिर्जगत की व्याप्ति है। मिश्र जी मूलतः अभिशप्त जीवन के पक्षधर लेखक हैं अतः इनकी कहानियों में नारी और दलित-यातना के कितने ही आयाम सहज रूप में मूर्त हुए हैं। इन्होंने अपनी विद्रोह-चेतना को बखूबी रेखांकित किया है। कथ्य की ईमानदारी और अभिव्यक्ति-सहजता इनकी कहानियों को अद्भुत पठनीयता प्रदान करती है।”

About the Author

हिन्दी में कुछ कहानीकारों की नियति इस माने में बेहद दयनीय है कि उनकी पहचाने किसी ‘आन्दोलन’ तक सीमित है। उनकी चर्चा करते समय ‘रचनाधर्मिता’ पर कम, सम्बद्ध आन्दोलन पर विचार-विमर्श ज्यादा होता है। इसके ठीक विपरीत रामदरश मिश्र जैसे कुछ कहानीकारों को आन्दोलनों की जलवायु रास नहीं आती। हालाँकि रामदरश मिश्र ने नयी कहानी के जमाने से लिखना शुरू किया और सक्रिय कहानी और जनवादी कहानी के मौजूदा शोरशराबे के बीच भी रचनात्मक स्तर पर खूब सक्रिय रहे लेकिन उनकी कहानियाँ किसी एक साँचे में फिट नहीं बैठती हैं। अनुभव, बोध और रूपबंध के स्तर पर उनमें पर्याप्त वैविध्य है। उनकी सभी कहानियों से गुजरते समय यह तथ्य बहुत अच्छी तरह उभरकर सामने आता है कि मुख्यतः सामाजिक संबंधों और सवालों पर केन्द्रित ये कहानियाँ बहुआयामी अनुभवशीलता, प्रासंगिक मूल्यबोध और कलात्मक परिपक्वता के तालमूल से रची गयी हैं। मिश्र जी की कहानियों में से ‘खाली घर’, ‘सीमा’, ‘निर्णयों के बीच एक निर्णय’, ‘सड़क’, ‘एक वह’, ‘कर्ज’, ‘मुर्दा मैदान’ ‘एक अधूरी कहानी’, ‘पानी’, ‘लड़की’, दिन के साथ’ आदि करीब एक दर्जन कहानियाँ उपलब्धि के तौर पर रेखांकित की जा सकती हैं।

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