गाँव की आवाज़ (रामदरश मिश्र की गाँव पर केन्द्रित कहानियाँ)
Description
“वरिष्ठ साहित्यकार रामदरश मिश्र जी के पास ग्रामीण परिवेश से जुड़ी रचनाओं का एक विपुल साहित्य-संसार है। गाँव की आवाज़ शीर्षक से यह संग्रह उसमें से चुनिंदा 17 कहानियों को संजोये हुए है। इनमें मिश्र जी की सुप्रसिद्ध कहानियाँ जैसे “”सड़क,”” “”खाली घर,”” “”वसन्त का एक दिन,”” “”एक औरत एक ज़िंदगी,”” “”माँ, सन्नाटा और बजता हुआ रेडियो,” “विदूषक,” “सर्पदंश,” आदि तो हैं ही, साथ में नवीनतम कहानी “”सुशीला”” भी संग्रहीत है। सामाजिक यथार्थ की अनुभूत जमीन पर कही गई लोक-संवेदना की अन्तरंग पहचान की ये कहानियाँ गाँव से जुड़े ताजे रूपकों का समुच्चय है। लोक सर्वव्यापी है की अवधारणा को पुष्ट करती मिश्रजी की कहानियाँ बहुआयामी मनुष्य और समाज को कहने में पूर्णतः समर्थ हैं। यही कारण है कि इन कथाओं में गाँव की मुखर होती मानवीय आवाज़ अपने में राजनीति, धर्म, बाज़ार, संस्कृति, देश, विदेश, महानगर, कस्बा आदि की आवाज़ों को भी समोये है।
देश की आत्मा गाँव में बसती है। इस सच्चाई को बड़ी सहजता से मिश्र जी ने उकेरा है। मिश्र जी के पात्र दिखने में कस्बाई हों या महानगरीय वे भीतर से गाँव को जी रहे होते हैं। उनके गंवई पात्र देश-दुनिया की राजनीति को बड़े अच्छे से समझते हैं। वे धर्म, बाज़ार, संस्कृति आदि की जीवंत व्याख्याएं प्रस्तुत ही नहीं करते बल्कि जीते हैं। गाँव पर केंद्रित इन कहानियों में और भी बहुत कुछ है। क्या सच में गाँव में यह सब कुछ संभव है? इस सवाल का ज़वाब मिश्र जी की कहानियों को पढ़ते हुए अनेक प्रकार से पाया जा सकता हैं। इसी पुस्तक से …”
About the Author
“डॉ. वेद मित्र शुक्ल
जन्म : 2 नवम्बर 1980 (बहराइच, उ.प्र.)
माता-पिता : श्रीमती सुधा एवं श्री गुलाब चंद्र शुक्ल
शिक्षा : एम.फिल., पीएच. डी., जे.एन.यु., नई दिल्ली
सृजन : एक समंदर गहरा भीतर (सॉनेट संग्रह, 2021), जारी अपना सफर रहा (ग़ज़ल संग्रह, हिंदी अकादमी, दिल्ली से सम्मानित, 2019), बापू से सीखें एवं कहावतों की कविताएं (बाल कविता संग्रह क्रमशः 2018 व 2019), रामदरश मिश्र की लम्बी कविताएँ (संपादित, 2019), सपनों भरे दिन : किशोरों पर केंद्रित कथाएँ (संपादित, 2020), गाँव की आवाज़ : रामदरश मिश्र की गाँव पर केंद्रित कहानियाँ (संपादित, 2021), दीनदयाल उपाध्यायः संपूर्ण वांग्मय (सहसंपादन 15 खंडों में, 2016), लॉन्ग पोयम्स ऑफ नरेंद्र मोहन (अनुवाद, 2019), मीनिंग इन भर्तृहरिज वाक्यपदीय (आलोचना, 2021)।
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में ग़ज़लें, कविता, कहानी, संस्मरण, शोधपत्र, आलेख, अनुवाद आदि प्रकाशित ।
विशेष रुचि : भारतीय लोक वाद्ययंत्र वंशी व तबले में संगीत प्रभाकर ।
संप्रति”






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