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हरिवंश राय बच्चन की आत्मकथा

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Author Name – Ruchira Dhingra
डॉ० हरिवंशराय ‘बच्चन’ का नाम लेते ही उनकी कालजयी कृति ‘मधुशाला’ की पंक्तियाँ मानस में गुंजरित होने लगती हैं। ‘मधुशाला’ में सुनने वालों का आह्वान करके उनकी लेखनी ने विश्राम नहीं लिया। विभिन्न भाव लहरियों से समन्वित काव्य रचनाएँ.

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हरिवंश राय 'बच्चन' की आत्मकथा - Harivansh raay bachchan kee aatmakatha

Description

डॉ० हरिवंशराय ‘बच्चन’ का नाम लेते ही उनकी कालजयी कृति ‘मधुशाला’ की पंक्तियाँ मानस में गुंजरित होने लगती हैं। ‘मधुशाला’ में सुनने वालों का आह्वान करके उनकी लेखनी ने विश्राम नहीं लिया। विभिन्न भाव लहरियों से समन्वित काव्य रचनाएँ. प्रेमरस आपूरित रोचक कहानियाँ, दिनों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करती डायरी, गंभीर चिंतन और विश्लेषण से युक्त निबंध एवं समीक्षाएँ, विदेशी काव्य ग्रंथों तथा पाश्चात्य नाट्य सम्राट शेक्सपीयर की चार प्रमुख त्रसदियों का गद्य-पद्यात्मक अनुवाद उनकी मौलिक सृजन क्षमता के प्रमाण हैं। उनके इस अभूतपूर्व व्यक्तित्व एवं कृतित्व को जानने की जिज्ञासा को तृप्त करती उनकी आत्मकथा ‘दशद्वार से सोपान तक’ का अपना ही महत्त्व है।

About The Author

बच्चन के कवि रूप के हर पक्ष को आलोचकों, शोधार्थियों ने अपनी-अपनी दृष्टि से विवेचित विश्लेषित किया और उनमें निहित संघर्षों में भी अचल रही जिजीविषा, नियति की अपरिहार्यता में आस्था और स्वयं की सामर्थ्य और कर्मनिष्ठा पर विश्वास तथा जर्जर परंपराओं एवं रूढ़ियों की जकड़न से मुक्त व्यक्तित्व से पाठकों की पहचान करायी किंतु उनके गद्य साहित्य पर अपेक्षित कार्य न होने से संघर्षपूर्ण जीवन में भी अनवरत सहज भाव से साहित्य- सृजन करने वाले अति सामान्य से अति विशिष्ट बने ‘बच्चन’ को सम्यक् रूप में नहीं जाना जा सका। अपने सु और कु दोनों रूपों की सहज व्यामोह रहित स्वीकृति उनकी महानता की संस्तुति करती है। समय के साथ भावों की परिपक्वता और उत्तरोत्तर तराशी जाती भावाभिव्यक्ति भावक को बहुत कुछ सिखाती, बताती है। उसे जीने की सही दिशा-निर्देशित करती है। उनकी आत्मकथा उनकी कविताओं सदृश अपने पाठकों को धैर्य, साहस और कर्मठता का संदेश देती है।

लेखिका : प्रो० रुचिरा ढींगरा

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