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काशी का रंगमंच और भारत

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Author Name – Dr. Prabhanshu Ojha
इस पुस्तक का उद्देश्य भारतीय रंगमंच परंपरा की वृहद पृष्ठभूमि के भीतर काशी की रंगमंच परंपरा के ऐतिहासिक विकास, स्वरूप और रंग-परिवेश एवं हिंदी नवजागरण में उसके योगदान का अध्ययन करना है।

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काशी का रंगमंच और भारतेंदु- kaashee ka rangamanch aur bhaaratad

Description

पुस्तक परिचय

इस पुस्तक का उद्देश्य भारतीय रंगमंच परंपरा की वृहद पृष्ठभूमि के भीतर काशी की रंगमंच परंपरा के ऐतिहासिक विकास, स्वरूप और रंग-परिवेश एवं हिंदी नवजागरण में उसके योगदान का अध्ययन करना है। भारतीय रंगमंच परंपरा में काशी की रंगमंचीय परंपरा का विशिष्ट स्थान है। भारतीय रंगमंच परंपरा के बहुविध और प्राचीनतम रूप, काशी रंगमंच परंपरा में सर्वत्र दिखाई पड़ते हैं। भारत की प्राचीन सभ्यतात्मक विशिष्टताओं को भी काशी ने समय-समय पर आत्मसात किया है। यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं है कि आधुनिक हिंदी रंगमंच का स्वरूप भी बहुत हद तक काशी की विशिष्ट रंगमंच परंपरा से प्रभावित है। यह नगरी आधुनिक हिंदी रंगमंच की सिद्धांत निमृति करने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र के रंगकर्म का भी स्थान रही है। सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से काशी की रंग-परंपरा में ऐसे बहुत से सूत्र निहित रहे हैं जिनके अध्ययन से न केवल काशी की, बल्कि आधुनिक हिंदी रंग-परिवेश की विशिष्टताओं को भी रेखांकित किया जा सकता है। चूँकि उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में तत्कालीन पश्चिमोत्तर प्रांत में काशी हिंदी नवजागरण का केंद्र था और स्वयं भारतेंदु हिंदी नवजागरण क्षेत्र के प्रथम नागरिक थे, अतः यह स्वयं में रोचक प्रश्न है कि उनके द्वारा आरंभ की गई आधुनिक हिंदी रंग-परंपरा में हिंदी नवजागरण के तत्त्व किन रूपों में परिलक्षित हुए तथा उसने कैसे आधुनिक हिंदी नाट्य परंपरा का मार्ग प्रशस्त किया।”

About The Author

लेखक परिचय

नाम डॉ. प्रभांशु ओझा

जन्म

15 फरवरी 1993, प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश)

शिक्षा- बी.ए. (ऑनर्स) हिंदी, 2013, किरोड़ीमल

कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय-एम.ए. (हिंदी) हंसराज कॉलेज, दि.वि. 2015-पी. जी. डिप्लोमा (हिंदी – अंग्रेजी) अनुवाद, दिल्ली विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग, (2016)-पीएच.डी. हिंदी विभाग, (2021), दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली-110007।

उपलब्धियां – अखिल भारतीय वाद-विवाद

प्रतियोगिताओं में 500 से अधिक पुरस्कार।

– विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में 100 से अधिक लेख प्रकाशित।

– दिल्ली विश्वविद्यालय के सर्वाधिक प्राचीन छात्रावास ग्वायर हॉल के अध्यक्ष पद का निर्वहन (2017-18)

पुस्तक परिचय-सभ्यता, संस्कृति, अध्यात्म और ज्ञान के केंद्र के रूप में काशी का एक समृद्ध इतिहास रहा है।”

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