काव्यांग दर्पण - Kavyang Darpan
Description
“डॉ. नरेश मिश्र भाषाविज्ञान और साहित्यालोचन के अधिकारी विद्वान हैं।
आपने ‘काव्यांग दर्पण’ में साहित्य-सृजन के आधार तत्त्व रस, अलंकार और छंद का विवेचन पूर्ण भाषा में किया है। माध्यमिक कक्षाओं से ही काव्य के रसात्मक बोध और काव्य-सौंदर्यानुभूति के रस और अलंकार का अध्ययन कराया जाता है। इसे दृष्टिगत कर पुस्तक में रस, अलंकार और छंद की परिभाषा, लक्षण, स्वरूप को बोधगम्य रूप में प्रस्तुत किया है। कई-कई प्रचलित उदाहरणों को देकर सरल और मनपसंद उदाहरण चयन का अवसर दिया गया है। मस्तिष्क की परिपक्वता, साहित्य-अध्ययन, चिंतन और सृजन में काव्यांग-रस, अलंकार और छंद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
मेरा विश्वास है कि पुस्तक विद्यार्थियों और हिंदी-प्रेमियों के लिए विशेष उपयोगी होगी। पुस्तक पठनीय और संग्रहणीय है।
-डॉ. विजय कमार वेदालंकार पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग हिंदू कॉलेज सोनीपत (हरियाणा)”
About The Author
“काव्य की रचना और उसकी मनभावन संप्रेषणीयता अभिव्यक्ति में काव्यांग अर्थात् रस, अलंकार, और छंद की विशेष भूमिका होती है। काव्यांग की अनुकूलता से काव्य के अंतरंग और बहिरंग दोनों पक्षों में अद्भुत आलोक विकसित होता है। यह निर्विवाद तथ्य है कि काव्यांग के अनुकूल ज्ञान से साहित्यिक समझ में सराहनीय श्रीवृद्धि होती है।
इस पुस्तक की रचना को विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा के प्रतिभागियों को ध्यान में रखकर सरल और बोधगम्य भाषा में की गई है। पुस्तक के विभिन्न संदर्भों में सरल सुबोध, और अपेक्षाकृत अधिक प्रचलित उदाहरणों को दिया गया है। जिससे इनका अध्ययन और याद करना सरल हो ।”






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