XStore theme
0 Days
0 Hours
0 Mins
0 Secs

No products in the cart.

Kashmeeree Panditon kee Anakahee Kahaanee

1,195.00

🔥 4 items sold in last 7 days
30 people are viewing this product right now

Author Name – Dr. Mona Yadav
“जिस प्रकार से साम्प्रदायिक आधार पर पाकिस्तान से उजड़कर हिंदुस्तान में आने और यहाँ की अपनी जडों से कटकर दूसरे वतन के रूप में बेदखल हुए लोग आज तक भी अपने दर्द से उबर नहीं पाए हैं।

In stock

or
SKU: HSP0030 Categories:
Estimated delivery:May 20, 2026 - May 22, 2026

कश्मीरी पंडितों की अनकही कहानियाँ - Kashmeeree Panditon kee Anakahee Kahaanee

Description

“जिस प्रकार से साम्प्रदायिक आधार पर पाकिस्तान से उजड़कर हिंदुस्तान में आने और यहाँ की अपनी जडों से कटकर दूसरे वतन के रूप में बेदखल हुए लोग आज तक भी अपने दर्द से उबर नहीं पाए हैं। ठीक इसी प्रकार कश्मीर में क्षेत्रीय स्वायत्ता प्राप्ति के लिए, अस्थिर राजनीति एवं विविध राजनीतिक स्वार्थों के कारण लोगों को धार्मिक आधार पर एक करके वहाँ के मूल निवासी कश्मीरी पंड़ितों एवं मुस्लिम में साम्प्रदायिकता एवं धार्मिक असहिष्णुता के बीज को दिए। इन अकाली राजनीतिक नीतियों और साम्प्रदायिक स्थितियों के बीच कश्मीरी पंड़ितों को अपने ही देश में अपने वतन से निष्काषित कर दिया गया, तब से आज तक वे शरणार्थी शिविरों में नारकीय जीवन जीने को अभिशप्त हैं। उनके अपनी जड़ों से कटने व कहीं ओर न जम पाने की जटिल परिस्थितियों, समस्याओं को केन्द्र में रखकर साहित्यकारों ने विस्थापित कश्मीरी समाज को विभिन्न कोणों से

संवेदनात्मक दृष्टिकोण से देखा एवं परखा है। विस्थापन की इसी समस्या को केन्द्रित करके हिन्दी साहित्य में अनेक उपन्यास लिखे गए, जिनमें देश विभाजन के समय से ही घाटी में सक्रिय अलगाववादी नीतियों एवं आंतकवादी संगठनों के कारण हिंसा, आंतक एवं भय तथा विस्थापन के दश को वर्णित किया है यह पुस्तक”

About The Author

प्रेमचंद धार्मिक पाखंड और सांप्रदायिकता को सभ्य समाज के लिए अभिशाप मानते थे। वह समझ चुके थे कि भारत को आजाद राष्ट्र के रूप में विकसित करने में यह दो बड़ी बाधाएं थीं जिसका बड़ी चतुराई से औपनिवेशिक सरकार इस्तेमाल कर रही थी। भारत में हिंदू-मुस्लिम संबंध की समस्या के मूल में ऐतिहासिक कारण तो रहा ही है, साथ ही निहित स्वार्थ वाले वर्गों की साजिश और औपनिवेशिक शासन की शातिर कूट नीति भी इसके पीछे अपना खेल खेल रही थी। प्रेमचंद ने इन दोनों प्रवृत्तियों और इन्हें हवा देने वाले लोगों का पर्दाफाश अपनी कहानियों में किया है।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Kashmeeree Panditon kee Anakahee Kahaanee”

Your email address will not be published. Required fields are marked

Featured Products