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Kavi-Vivek Jivan-Vivek: Kavita Ka Vaicharik Hastakshep

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Author Name – Om Nishchal
“आज के काव्यालोचकों में डॉ. ओम निश्चल का विशिष्ट स्थान है। वे इस रूप में सबसे अलग हैं कि वे किसी पूर्वग्रह या मतवाद के तहत समीक्ष्य लेखक और उसकी कृतियों का चुनाव नहीं करते बल्कि यहाँ-वहाँ जो कुछ लिखा जा रहा है उसे खुले मन और खुली दृष्टि से देखते हैं और यदि वह रचना उन्हें रुचती है तो खुले मन से प्रशंसा करते हैं

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कवि-विवेक जीवन-विवेक: कविता का वैचारिक हस्तक्षेप - Kavi-Vivek Jivan-Vivek: Kavita Ka Vaicharik Hastakshep

Description

“आज के काव्यालोचकों में डॉ. ओम निश्चल का विशिष्ट स्थान है। वे इस रूप में सबसे अलग हैं कि वे किसी पूर्वग्रह या मतवाद के तहत समीक्ष्य लेखक और उसकी कृतियों का चुनाव नहीं करते बल्कि यहाँ-वहाँ जो कुछ लिखा जा रहा है उसे खुले मन और खुली दृष्टि से देखते हैं और यदि वह रचना उन्हें रुचती है तो खुले मन से प्रशंसा करते हैं ‘कवि विवेक जीवन – विवेक’ विषयक पुस्तक में ओम निश्चल ने छायावाद से लेकर आज तक की अवधि में व्याप्त काव्य प्रवृत्तियों, काव्यांदोलनों और वादों को देखा परखा है और प्रायः ख्यात कवियों की कविताओं की निजी प्रकृति और उपलब्धियों की गहरी पहचान की है। कई विशिष्ट कवियों पर अलग से लेख लिखे हैं और विस्तार से उनके काव्य-स्वरूप और उपलब्धियों की परख की है। यह अवश्य संभव है कि कुछ महत्वपूर्ण कवि इसमें शामिल होने से रह गए हों, पर काव्य-सर्जना की धारा में आने वाले वरिष्ठ, युवा और नवीनतम कवियों की काव्य-कृतियों का आकलन करके ओम जी ने एक प्रकार से आधुनिक कविता का विशिष्ट इतिहास ही लिख दिया है।”

About The Author

ओम निश्चल
जन्म : 15 दिसंबर, 1958, प्रतापगढ़, उ.प्र. ।

शिक्षा : संस्कृत व हिंदी में एम.ए. पीएच.डी व पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा। शब्द सक्रिय हैं (कविता-संग्रह), भाषा की खादी (निबंध), खुली हथेली और तुलसीगंध (संस्मरण), द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरीः सृजन एवं मूल्यांकन, कविता का स्थापत्य, कविता की अष्टाध्यायी, कविता के वरिष्ठ नागरिक, कुंवर नारायणः कविता की सगुण इकाई, समकालीन हिंदी कविताः ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, चर्चा की गोलमेज पर अरुण कमल व शब्दों से गपशप सहित समीक्षा व आलोचना की कई पुस्तकें।

अज्ञेय आलोचना संचयन, अधुनांतिक बांग्ला कविता, विश्वनाथप्रसाद तिवारीः साहित्य का स्वाधीन विवेक, द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी रचनावली, कुंवर नारायण पर केंद्रित अन्वय एवं अन्विति सहित कई ख्यात कवियों की कृतियों का संपादन। तत्सम् शब्दकोश के सहयोगी संपादक एवं व्यावसायिक हिंदी सहित बैंकिंग वाड्.मय सीरीज (पांच खंड) के रचयिता।

कविता के लिए हिंदी अकादमी. दिल्ली एवं हिंदी संस्थान उ.प्र. द्वारा आचार्य रामचंद्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार से सम्मानित। जश्नेअदब के शान-ए-हिंदी खिताब % व विचार मंच, कोलकाता द्वारा प्रो. कल्याणमल लोढ़ा साहित्य सम्मान एवं यूको बैंक के अज्ञेय भाषा-सेत् सम्मान से विभूषित।

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