XStore theme
0 Days
0 Hours
0 Mins
0 Secs

No products in the cart.

कोरोना-काल की कहानियां (कोविड – 19 लोकडाउन समय की एक दर्जन कहानियां)

395.00

🔥 3 items sold in last 7 days
39 people are viewing this product right now

Author Name – ज़हीर कुरेशी
जहीर कुरेशी की ‘कोरोना-काल की कहानियाँ’
कोई भी रचनाकार आखिर मनुष्यता के बचाने के लिए ही लिखता-रचता है। जब मनुष्यता पर गंभीर संकट घहर पड़ता है, तो रचनाकार की संवेदना स्वाभाविक रूप से सक्रिय हो उठती है। कोरोना महामारी एक ऐसे वैश्विक संकट के रूप में प्रकट हुई कि उसने मानव जाति की अब तक की विकास के लिए की गई तमाम कोशिशों को चुनौती दे डाली। इसमें अब तक दूसरी आपदाओं के वक्त सहयोग के लिए उठते रहे हाथ भी सकुचाए से नजर आने लगे। इस समस्या से पार पाने की तमाम सरकारी और सामुदायिक कोशिशें लाचार साबित होती रहीं।

In stock

or
SKU: HSP0185 Categories:
Estimated delivery:June 1, 2026 - June 3, 2026

कोरोना-काल की कहानियां (कोविड – 19 लोकडाउन समय की एक दर्जन कहानियां)

Description

“जहीर कुरेशी की ‘कोरोना-काल की कहानियाँ’

कोई भी रचनाकार आखिर मनुष्यता के बचाने के लिए ही लिखता-रचता है। जब मनुष्यता पर गंभीर संकट घहर पड़ता है, तो रचनाकार की संवेदना स्वाभाविक रूप से सक्रिय हो उठती है। कोरोना महामारी एक ऐसे वैश्विक संकट के रूप में प्रकट हुई कि उसने मानव जाति की अब तक की विकास के लिए की गई तमाम कोशिशों को चुनौती दे डाली। इसमें अब तक दूसरी आपदाओं के वक्त सहयोग के लिए उठते रहे हाथ भी सकुचाए से नजर आने लगे। इस समस्या से पार पाने की तमाम सरकारी और सामुदायिक कोशिशें लाचार साबित होती रहीं। फिर भी मनुष्य की अदम्य जीजिविषा मरी नहीं और जीवन को नए सिरे से जीने के प्रयास होते रहे। मनुष्य की इसी जिजीविषा के इर्द-गिर्द बुनी गई कोरोना काल की ये कहानियां हैं। इनमें तमाम खतरों और मुश्किलों के बीच भी बच्चों की पैदाइश, शादी-विवाह, रोजी-रोजगार के लिए संघर्ष, विकास संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया चलती रही। इस जिजीविषा के महीन रेशे जीवन को उम्मीद से भर देते हैं। जहीर कुरेशी ने इन कहानियों के जरिए कोरोना काल में मनुष्य के जीवन में पैदा हुई मुश्किलों को न सिर्फ बारीकी से देखा, उसकी जद्दोजहद को महसूस किया और परोसा, बल्कि जीवन की नई स्थितियों, नई संभावनाओं को भी तलाशने की कोशिश की है।”

About the Author

“लेखकीय भूमिका के कुछ अंश

‘कोरोना-काल की कहानियाँ’ एक प्रकार से लॉकडाउन एक से ले कर लॉकडाउन : चार के बीच की जिन्दगी का मुखर आईना हैं। कुछेक कहानियों को विश्वस्नीय बनाने के लिए मैंने वुहान से वायुयान द्वारा 30 जनवरी को भारत (केरल) में कोविड-19 संक्रमण आने का जिक्र भी किया है। 30 जनवरी, 2020 से प्रधान-मंत्री द्वारा भारत के 130 करोड़ नागरिकों से माँगे गए एक दिन ‘जनता-कर्फ्यू’ (22 मार्च, 2020) तक पौने दो महीनों के कुछेक प्रसंगों का उत्प्रेरक के रूप में अनेक कहानियों में उपयोग किया गया है। 1 जून, 2020 से किए गए अनलॉक : एक प्रसंग का उपयोग केवल अंतिम दो कहानियों, क्रमशः ‘दर-ब-दर’ और ‘विनाश के बीज’, में कथा का उपसंहार करने के लिए हुआ है। कुल मिला कर, कोरोना काल की एक दर्जन कहानियाँ 30 जनवरी, 2020 से 5 जून, 2020 के सवा चार महीनों के बीच घटी कोरोना-काल की घटनाओं का ही कथात्मक रूप हैं।

जिस समय 24 मार्च, 2020 को बिना किसी तैयारी के इस महादेश के 130 करोड़ लोगों को ताला बंद किया गया, उस समय भारत में केवल 500 लोग कोविड-19 संक्रमित थे। दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन के सत्तर दिनों में कोरोना मरीज 500 से बढ़ कर हज़ारों की संख्या तक पहुँच गए, उसके बाद भारत में ‘अनलॉक : एक, दो, तीन, चार’ आरंभ हुआ। अब तो देश में कोरोना-संक्रमित मरीज़ों की संख्या 85 लाख से भी ऊपर है।

– लेखकीय अपनी बात से उद्धृत”

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “कोरोना-काल की कहानियां (कोविड – 19 लोकडाउन समय की एक दर्जन कहानियां)”

Your email address will not be published. Required fields are marked

Featured Products