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Krishna Sobti’s Novel on the Feminine Side of Discourse

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Author Name – Lakshmi Vishnoi
स्त्री जन्म से ही उपेक्षित रही है। उसकी देह को ही उसकी सीमा मान लिया गया है जबकि विचार के स्तर पर स्त्रियाँ पुरुषों से कम नहीं होती हैं।

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विमर्श का स्त्री पक्ष कृष्णा सोबती के उपन्यास- Krishna Sobti's Novel on the Feminine Side of Discourse

Description

स्त्री जन्म से ही उपेक्षित रही है। उसकी देह को ही उसकी सीमा मान लिया गया है जबकि विचार के स्तर पर स्त्रियाँ पुरुषों से कम नहीं होती हैं। वह जब-जब अपनी अस्मिता के प्रति सचेत होकर आगे आना चाहती है तो उसे उसकी देह की सीमा में बांध दिया जाता है। प्राचीनकाल में स्त्रियाँ पूजनीय थीं। उनकी सामाजिक स्थिति गरिमापूर्ण थी। इस दौर में स्त्रियाँ पूजी जाती थी। मध्यकाल में स्त्री की वह गरिमामई छवि टूट गई। मध्यकाल में राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन हुआ। लगातार विदेशी आक्रमणों एवं भिन्न-भिन्न सांस्कृतिक परिवेश के लोगों के आगमन के कारण भारत का सांस्कृतिक स्वरूप ध्वस्त होने लगा। इसी समय भारत में इस्लाम आया। इस्लाम के आक्रमण ने भारत की सांस्कृतिक समरसता को भंग किया स्त्रियों की स्थिति में भी परिवर्तन आया। मध्यकाल तक आते-आते स्त्री के दिव्य गुण धीरे-धीरे अवगुण बनने लगे साम्राज्ञी से वह धीरे-धीरे आश्रिता बन गयी। जो स्त्रियाँ वैदिक युग में धर्म और समाज का प्राण थी। उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।

About The Author

“डॉ. लक्ष्मी विश्नोई

शिक्षा : बी.ए., एम.ए. एवं पी-एच.डी., दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शोधालेख प्रकाशित।

वर्तमान में श्यामलाल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में सहायक के पद पर कार्यरत। “

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