‘पाश्चात्य कथा कहन चिंतन और हिंदी कहानी - Paschatya Katha – Kahan Chintan Aur Kahani
Description
साहित्य स्पःशास्त्रीय विश्लेषण डॉ. ज्ञानराज काशीनाथ गायकवाड की शास्त्रीय रचना है। भारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न बिन्दुओं पर यद्यपि अनेक रचनायें प्रकाशित होती आ रही हैं किन्तु वे सैद्धान्तिक विस्तार के कारण जन ग्राह्य नहीं हो पातीं। सामान्य साहित्य शास्त्र-जिज्ञासु की अपेक्षा रहती है, व्यवस्थित, संक्षिप्त और तथ्यपरक विवरण की। इस दृष्टि से गायकवाड जी की कृति निस्सन्देह श्रेष्ठ है। काव्य-स्वरूप, काव्य-रूप, साहित्य-स्वरूप, साहित्य-रूप, रस और आलोचना शीर्षकों के अन्तर्गत विज्ञ लेखक ने काव्यरचना की उन काव्य परम्पराओं को विश्लेषित किया है, जिनका सम्बन्ध, साहित्य के अध्येताओं से है।
रचनाकार की प्रस्तुत कृति में किसी मौलिकता का दावा नहीं है। स्वयं रचनाकार इस कृति को अध्येताओं के लिए उपादेय स्वीकार करता है। इसके बावजूद लेखक ने भारतीय काव्यशास्त्र के बुनियादी प्रश्नों को जिस सहजता से समाधानित किया है, वह श्लाध्य है। पुस्तक का नवीन संस्करण कृति की लोकप्रियता का मापक है।






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