मंगलेश डबराल की काव्यानुभूति - Manglesh Dabral Ki Kavyanubhuti
Description
“डवराल जी ने पहाड़ी जीवन का दस्तवेज प्रस्तुत करते हुए “पहाड़ पर लालटेन” जलायी थी, वह रोशनी गाँव से शहर में आये व्यक्ति के जीवन कि अकुलाहट का आख्यान प्रस्तुत करते हुए “”घर का रास्ता’ बनाती है। मानवीय संवेदनाओं से गहरा सरोकार रखते हुए मूल्य विहीन होती जा रही सामाजिक व्यवस्था “”हम जो देखते है”” उसमें मानवता के लिए ‘आवाज भी एक जगह है’ के विविध स्वरों में गुननीयमान काव्य स्वरूप का दर्शन होता है। इस दौर में आम आदमी यांत्रिक हो गया है, उसमें प्रेम, संवेदना, खुशी बाजारवादी शत्रु के द्वारा छीन ली गई है। डबराल जी ने इस ‘नये युग के शत्रु’ से हम सबको बचाने का प्रयास किया है।
इसी पुस्तक से”
About The Author
“जागरण
डॉ. सुरेश कुमार मिश्र
जन्म : 10 जुलाई 1978, जंघई (बिरगही का पूरा), जनपद जीनपुर, उत्तर प्रदेश
माता: श्रीमती विमला मिश्रा
पिता : श्री संकठा प्रसाद मिश्र
शिक्षा: एम.ए., पी.एचडी. (हिन्दी) एम.ए. (शिक्षाशास्त्र)
शोधकार्य : सरदार पटेल वि.वि. आनंद, गुजरात ‘मंगलेश डबराल का काव्यः एक अनुशीलन
शोधपत्र : एक दर्जन से अधिक शोध पत्र
प्रकाशित, विभिन्न साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में समय-समय पर समालोचना, लघु कथा और सामाजिक समीक्षा प्रकाशित ।
प्रकाशकाधीन : कलंक (उपन्यास), पतझड़ कि
आवाज़ (कविता संग्रह) तथा मंगलेश डबराल और उनकी समकालीनता
सम्प्रति : जननायक चन्द्रशेखर वि. विद्यालय बलिया के मथुरा पी.जी. कॉलेज रसड़ा में सहायक आचार्य पद पर कार्यरत
सम्पर्क सूत्र : मथुरा पी.जी. कॉलेज रसड़ा बलिया”






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