नाट्य सहचरी - Naaty Sahacharee
Description
“जैनेन्द्र चौहान
03 दिसम्बर, 1991 को असम के पश्चिम कार्बी आंगलंग में जन्मे जैनेन्द्र चौहान ने प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा अपने ग्राम नवाईबिल से ही पूरी की तथा उच्चतर शिक्षा गौहाटी विश्वविद्यालय से संलग्न लंका महाविद्यालय, होजाई से स्नातक तथा गौहाटी विश्वविद्यालय से हिंदी विषय में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की। तदुपरांत आपने गौहाटी विश्वविद्यालय के ही अंतर्गत कृष्ण बोरा बी. एड. कॉलेज, लंका से बी. एड. की उपाधि प्राप्त की। आपने लगभग एक वर्ष लंका महाविद्यालय में अनुबंधीय प्राध्यापक के रूप में अध्यापन किया। पुनः गौहाटी विश्वविद्यालय से हिंदी में एम. फिल करने के बाद वर्तमान में पी-एच.डी. के शोधार्थी हैं। आपने ‘असम साहित्य सभा मुक्त शिक्षा पाठ्यक्रम संसद से ‘असमीया भाषा शिक्षा पाठ्यक्रम की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है तथा ‘असम साहित्य सभा के सहयोग से तेजपुर विश्वविद्यालय में आयोजित डिप्लोमा इन कम्युनीकेटीव असामीज की परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। इसी दौरान आपने नेट और स्लेट के साथ-साथ टेट की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली है। आपने कई राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सफलता पूर्वक अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये हैं। आपके कई अनुसंधात्मक आलेख विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। सदैव लेखन-कार्य व साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहने के कारण कई संस्थानों ने आपको सम्मानित व पुरस्कृत भी किया है। इसी दौरान आपकी बहाली असम सरकार के माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत एक उच्च विद्यालय में हिंदी अध्यापक के रूप में हो चुकी है।”
About The Author
संगीता कुमारी पासी
15 जनवरी 1991 को नगाँव में जन्मी संगीता कुमारी पासी ने प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा अपने जिला नगाँव से ही पूरी की तथा उच्चत्तर और स्नातक की शिक्षा गौहाटी विश्वविद्यालय से संलग्न नगाँव गर्ल्स कॉलेज से पूरी की। आपने स्वर्णपदक सहित कॉटन विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (हिन्दी) की डिग्री प्राप्त की। गौहाटी विश्वविद्यालय से आपने एम.फिल की तथा वर्तमान में आप कॉटन विश्वविद्यालय में पीएच.डी. की शोधार्थी हैं। आपने दो वर्ष तक कॉटन विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर (अतिथि) के रूप में अध्यापन किया है। इसी बीच आपने नेट, स्लेट और टेट की परीक्षा में सफलता प्राप्त की। आपकी ‘आषाढ़ का एक दिन’ और ‘लहरों के राजहंस’ नाटक में कथ्य और शिल्प’ शीर्षक से आलोचनात्मक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। आपने कई राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सफलता पूर्वक शोध पत्र प्रस्तुत किये तथा हिन्दी की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में आपके शोधपरक लेख प्रकाशित हो चुके हैं। आपको कई संस्थाओं से सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।”






Reviews
There are no reviews yet.