नित्यानंद तिवारी की कथालोचना- Nityanand Tiwari Ki Kathalochana
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About The Author
“डॉ. नित्यानंद तिवारी जन्म : 8 अप्रैल, 1938 को डेहमा, गाजीपुर (उत्तर प्रदेश)।
शिक्षा : इलाहाबाद विश्वविद्यालय में। वहीं से 1964 में ‘मध्ययुगीन रोमांचक आख्यान’ पर डी. फिल. की उपाधि ।
1965 से 2003 तक हिन्दी विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। वहीं से प्रोफेसर और अध्यक्ष पद से अवकाश प्राप्त ।
आधुनिक साहित्य और इतिहास बोध’ ‘सृजनशीलता का संकट’ ‘प्रसंग और आलोचना, मध्यकालीन साहित्य : पुनरवलोकन’ प्रमुख पुस्तके प्रकाशित। नये साहित्य के आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी और उसके प्रमुख सिद्धांतकारों में।
परियल’ से साहित्य-यात्रा का आरंभ ।
साहित्य अकादमी (केन्द्रीय), हिन्दी अकादेमी (दिल्ली) की संचालन समिति और भारतीय ज्ञापनीठ पुरस्कार की निर्णायक समिति (प्रवर परिषद्) के पूर्व सदस्य ।
प्रेम तिवारी
दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज में हिंदी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। इन्होंने ‘वनारस का साहित्यिक इतिहास’ विषय पर जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से पीएच. डी. किया है। जनवादी लेखक संघ, दिल्ली राज्य के सचिव एवं हिंदी विकास संस्थान, दिल्ली के उपाध्यक्ष हैं। समकालीन कथा-साहित्य में गहरी रुचि के साथ सामाजिक-राजनीतिक जन-आंदोलनों में सक्रिय रहते हैं। कथा-साहित्य पर इनके आलोचनात्मक आलेख ‘आलोचना’, ‘परिकथा’, ‘आजकल’, ‘नायपथ’, ‘उद्भावना’, ‘पक्षधर’, ‘समय के साखी’, ‘सृजन सरोकार’, ‘नई धारा’, ‘अनभै साँचा’, ‘साक्षात्कार’, आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं।”






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