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प्रत्यागमन

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Author Name – पूनम सिंह कुशवाहा
शुभकामना
सुश्री पूनम सिंह कुशवाहा वाराणसी की एक सक्षम लेखिका हैं। इन्होंने अपने उपन्यास तथा कहानियों पर अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है। चुपचाप लिखते हुए अनुभूतियों को एकाग्र करने में सिद्धहस्त हैं। नारी मन की विवेचना में अग्रणी हैं जो आधुनिक कहानी लेखन की ओर उन्मुख दिखाई पड़ती हैं। नारी मन की कोमल और आत्मिक भावनाओं को, मानसिक सौंदर्य को कहानी के माध्यम से व्यक्त करने में पूर्णतः सफल हैं। अधिकतर नारियाँ चुपचाप धैर्य पूर्वक जीवन में आने वाली पीड़ाओं का सामना करती हैं। यह पीड़ा मानसिक, आर्थिक, पारिवारिक, सामाजिक किसी भी तरह की हो सकती है।

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प्रत्यागमन

Description

“शुभकामना सुश्री पूनम सिंह कुशवाहा वाराणसी की एक सक्षम लेखिका हैं। इन्होंने अपने उपन्यास तथा कहानियों पर अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है। चुपचाप लिखते हुए अनुभूतियों को एकाग्र करने में सिद्धहस्त हैं। नारी मन की विवेचना में अग्रणी हैं जो आधुनिक कहानी लेखन की ओर उन्मुख दिखाई पड़ती हैं। नारी मन की कोमल और आत्मिक भावनाओं को, मानसिक सौंदर्य को कहानी के माध्यम से व्यक्त करने में पूर्णतः सफल हैं। अधिकतर नारियाँ चुपचाप धैर्य पूर्वक जीवन में आने वाली पीड़ाओं का सामना करती हैं। यह पीड़ा मानसिक, आर्थिक, पारिवारिक, सामाजिक किसी भी तरह की हो सकती है। इनकी कहानियाँ मध्यम वर्ग की पारिवारिक मनःस्थिति से रूबरू कराती हैं। परिवार के सदस्यों में आपसी समझ और संतुलन बैठाने का और स्वस्थ चित्रण का उद्देश्य है। इन्होंने मार्मिक लघु कथाएँ भी लिखी हैं और भावनात्मक बिम्ब प्रस्तुत करती कविताएँ भी। यह एक श्लाघनीय एवं प्रशंसनीय प्रयास है जहाँ लेखिका सफल और साधुवाद की पात्र है।”

About the Author

“पूनम सिंह कुशवाहा मुझे बचपन से ही कहानियाँ पढ़ने और लिखने का शोक था। में जव कहानियों पढ़ती मुझे आत्मिक आनंद की अनुभूति होती। अतः मैंने हमेशा पढ़ना और लिखना जारी रखा और वे यदा-कदा प्रकाशित भी होती रहीं। मुंशी प्रेमचंद जी, अज्ञेय, अमृता प्रीतम, मृदुला गर्ग, शिवानी आदि मेरे पसंदीदा लेखक व लेखिका थीं। शरतचंद्र जी के हिन्दी में अनुवादित उपन्यासों को बहुत ही पढ़ती थी। वे कहीं बहुत गहरे मेरी संवेदनाओं को जगा देते थे। वही अनुभूति मेरे हृदय में आह्लाद और प्रेरणा के संदेश भरने लगी। राग द्वेप से दूर मानवीय संवेदनाओं का स्पर्श करते हुए शब्द बाहर आते गये और कहानी दर कहानी वनती और निखरती चली गयी। ‘प्रत्यागमन’ कहानी-संग्रह की कहानियाँ ‘एक कमरा अपना’, ‘दरकन’, ‘इंहित’, ‘दूसरी मीना’ आदि सभी कहानियाँ मेरे दिल के बहुत करीब हैं। ये कहानियाँ भाव और शब्दों का संयोजन ही नहीं हैं अपितु मेरी भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं। भावावेश में अवस्था विशेष का शब्दों में उपयुक्त चित्रण करना ही मेरा उद्देश्य है। नारी की तीव्र संवेदनाओं को भाषा के कलात्मक सौंदर्य से प्रस्तुत करने का यह मेरा मौलिक प्रयास है। मेरी भाव पक्ष की सधी कहानियों को मेरे पति ने अनुभव किया और सराहना करते हुए मुझे सतत् प्रोत्साहित किया है। पिछली रचनाओं की तरह इस वार भी उनका पूरा सहयोग मिला है। उनके सहयोग के बिना ‘प्रत्यागमन’ का प्रकाशित होना असम्भव-सा ही था। उन्हीं की प्रेरणा से ‘मुक्ति’ नयी कहानी संग्रह प्रकाशित होने वाली है। आपके सुझाव मेरे लिए प्रेरणादायक होंगे।”

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