प्रेमचंद या जेनेंद्र कहानियों का तुलानात्मक अध्ययन - Premachand or Jenendr Kahaaniyon ka Tulanaatmak Adhyayan
Description
यह पुस्तक मेरी एक परियोजना का रूपांतरण है। इसमें संवेदना और शिल्प के स्तर पर ‘प्रेमचंद और जैनेंद्र की कहानियाँ का तुलनात्मक अध्ययन’ किया गया है। तुलना का अर्थ यहाँ दोनों रचनाकारों में किसी को बड़ा-छोटा दिखाना नहीं है, न ही किसी को स्थापित या विस्थापित करना मेरा उद्देश्य है। इस पुस्तक की मूल भावना दो रचनाकारों की कहानियों का भाव और शिल्प के स्तर पर तुलना करना है। प्रेमचंद हिंदी कहानी को जादूगरी, तिलिस्म, ऐयारी की फंतासी दुनिया से निकालकर यथार्थ का ऐसा संसार रच रहे थे जिसमें आम आदमी की पीढ़ा और प्रतिरोध के लिए मुनासिब स्पेस था।
About The Author
प्रेमचंद धार्मिक पाखंड और सांप्रदायिकता को सभ्य समाज के लिए अभिशाप मानते थे। वह समझ चुके थे कि भारत को आजाद राष्ट्र के रूप में विकसित करने में यह दो बड़ी बाधाएं थीं जिसका बड़ी चतुराई से औपनिवेशिक सरकार इस्तेमाल कर रही थी। भारत में हिंदू-मुस्लिम संबंध की समस्या के मूल में ऐतिहासिक कारण तो रहा ही है, साथ ही निहित स्वार्थ वाले वर्गों की साजिश और औपनिवेशिक शासन की शातिर कूट नीति भी इसके पीछे अपना खेल खेल रही थी। प्रेमचंद ने इन दोनों प्रवृत्तियों और इन्हें हवा देने वाले लोगों का पर्दाफाश अपनी कहानियों में किया है।






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