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Raṅga Bārtā Sampādaka

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Author Name – Prō. Ramā kapila kumāra
नाड्य रचना और प्रदर्शन एक-दूसरे से पृथक नहीं हैं और न ही हो सकते हैं। नाट्य रचना के विवेचन-विश्लेषण के लिए नाट्य-कृति का अध्ययन और उसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा अनिवार्य है और प्रदर्शन को समझने के लिए विभिन्न रंगमंचीय तत्त्व, सिद्धांत, व्यवहार, अनुशासन इत्यादि को जानना आवश्यक है।

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Raṅga Bārtā Sampādaka

Description

नाड्य रचना और प्रदर्शन एक-दूसरे से पृथक नहीं हैं और न ही हो सकते हैं। नाट्य रचना के विवेचन-विश्लेषण के लिए नाट्य-कृति का अध्ययन और उसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा अनिवार्य है और प्रदर्शन को समझने के लिए विभिन्न रंगमंचीय तत्त्व, सिद्धांत, व्यवहार, अनुशासन इत्यादि को जानना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस पुस्तक में विभिन्न आलेखों का संकलन किया गया है। रंगमंच के सिद्धांत एवं व्यवहार पर पहले से ही कई पुस्तकें पाठकों के बीच उपलब्ध हैं और हिंदी भाषा के महत्त्वपूर्ण और प्रसिद्ध नाटकों पर समीक्षात्मक लेखों की उपलब्धता भी कम नहीं है। किंतु इस पुस्तक में ऐसे लेखों का चयन प्रस्तुत किया गया है जिसका उद्देश्य है, रंगमंच को पढ़ने-समझने वाले सुधी पाठकों को एक ही स्थान पर कुछ महत्त्वपूर्ण नाटकों पर समीक्षात्मक लेख भी मिल जाएं और रंगमंच के विभिन्न सिद्धांत, विभिन्न नाटककारों की रंगदृष्टि, रंगमंच से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी आदि से परिचय भी हो जाए। ऐसा नहीं है। है कि इससे पहले चयनित लेखों के विषयों पर बात-चीत नहीं हुई है किंतु उन विषयों पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करना और कुछ नए आयामों को खोलना इस संकलन का मुख्य ध्येय है।

About The Author

कपिल कुमार

जन्म : 22 जून 1993 को दिल्ली में, मूल निवासी उत्तराखण्ड (द्वाराहाट, जिला-अल्मोड़ा) ।

शिक्षा : प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा केंद्रीय विद्यालय,

दिल्ली में संपन्न हुई। तत्पश्चात् दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से 2014 में हिंदी विषय में स्नातक। 2015 में दिल्ली विश्वाविद्यालय से अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा। 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से हिंदी भाषा में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। वर्तमान में कुमांऊ विश्वविद्यालय, नैनीताल से ‘प्रेमचंद की कहानियों का रंगमंचीय विश्लेषण’ विषय पर पीएच.डी. में शोधरत ।

पूर्व कनिष्ठ हिन्दी-अनुवादक, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली। पिछले एक दशक से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय। 2017 में ‘रंगरेज़ थियेटर ग्रुप’ की स्थापना की। वर्तमान में ‘रंगरेज़ थियेटर ग्रुप’, दिल्ली के निर्देशक के रूप में कार्यरत।

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