‘पाश्चात्य कथा कहन चिंतन और हिंदी कहानी - Paschatya Katha – Kahan Chintan Aur Kahani
Description
शुक्ल जी से लेकर नामवर सिंह ने स्त्री लेखन को भावना, रुदन और पीड़ा का उच्चरण बताया फिर चाहे वे मीराँ हो या महादेवी।
अमृत राय ने महादेवी के काव्य को मूलतः आत्म केंद्रित आत्मलीन कहा है, उन्हें महादेवी के गीतों में अपनी ही पीड़ा की ध्वनि सुनाई दी। संसार की पीड़ा का अभाव खला महादेवी के अतिरिक्त अन्य कवयित्रियों की संवेदना और गहन जीवनानुभूति से आच्छादित काव्य पर इस तरह के आरोप ही लगते ही रहे हैं। किंतु कहीं-कहीं मुक्तिबोध जैसे साहित्य के नए प्रतिमान स्थापित करने की समझ रखने वाले आलोचकों ने स्त्री साहित्य को खुले मन से सराहा भी है। मुक्तिबोध रचनावली के पांचवे खंड में ‘सुभद्रा कुमारी की सफलता का’ नामक लेख में उन्होंने लिखा कि सुभद्रा की कविता में केवल भावुकता नहीं है बल्कि बाह्य जीवन पर संवेदनात्मक मानसिक प्रतिक्रियाए हैं।”” अन्य आलोचकों द्वारा सुभद्रा कुमारी चौहान को खी होने के कारण उनके काव्य को इतिहास ग्रंथों में उचित स्थान ना मिल सका। सत्य तो यह है कि पुरुष कवियों के समान स्त्री रचनाकारों ने भी भक्ति पूर्ण साहित्य के साथ- साथ देश और समाज की जागृति में देश प्रेम की कविताएँ भी लिखी। इसी श्रेणी में श्री बुंदेलवाला, श्री राम देवी, श्रीमती तोरण देव शुक्ल ‘सती’ और श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम आता है।






Reviews
There are no reviews yet.