XStore theme
0 Days
0 Hours
0 Mins
0 Secs

No products in the cart.

स्त्री विमर्श के आयाम

695.00

🔥 7 items sold in last 7 days
37 people are viewing this product right now

Author Name –  Dr. Urmila Sharma
स्त्री-विमर्श के आयाम’ उर्मिला शर्मा की पुस्तक है जिसमें मन्नू भंडारी और कृष्णा सोबती के साहित्य का आलोचनात्मक विश्लेषण है। पुस्तक में छह अध्याय हैं। पहले अध्याय में स्त्री की सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिति का अनुशीलन है।

In stock

or
SKU: HSP0079 Categories:
Estimated delivery:May 13, 2026 - May 15, 2026

स्त्री विमर्श के आयाम - Stree vimarsh ke aayaam mannoo bhandaaree evan krshna sobatee ke saahity ka aalochanaatmak vishleshan

Description

स्त्री-विमर्श के आयाम’ उर्मिला शर्मा की पुस्तक है जिसमें मन्नू भंडारी और कृष्णा सोबती के साहित्य का आलोचनात्मक विश्लेषण है। पुस्तक में छह अध्याय हैं। पहले अध्याय में स्त्री की सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिति का अनुशीलन है। इसमें वैदिक काल से लेकर अब तक की परिवर्तनशील स्थितियों का संकेत है, तो पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री की पारिवारिक स्थिति, राजनीतिक स्थिति तथा कामकाजी रूप में उसकी स्थितियों की चर्चा है। दूसरे अध्याय में स्त्री-विमर्श की अवधारणाओं के आलोक में आधुनिक हिंदी साहित्य को देखने का सफल प्रयत्न है। तीसरे अध्याय में कृष्णा सोबती की रचनाओं में समकालीन स्त्री विमर्श को जांचने का प्रयास है, तो चौथे अध्याय में मन्नू भंडारी की रचनाओं में उसे परखने का। पांचवां अध्याय दोनों लेखिकाओं के कथेतर गद्य में स्त्री प्रश्नों को देखा गया है, तो छठवें और अंतिम अध्याय में कृष्णा सोबती और मन्नू भंडारी के साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए उसमें स्त्री विमर्श की संभावनाओं को देखने की कोशिश है।

इस पूरी प्रक्रिया में उर्मिला शर्मा का यह प्रयत्न है कि वे कृष्णा सोबती और मन्नू भण्डारी के अवदान के वैशिष्ट्य को रेखांकित करते हुए स्त्री की नियति को परिभाषित करने, उसके मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष करने तथा पुरुषों के समकक्ष स्त्रियों की स्वाधीनता के लिए आवाज उठाने की दोनों लेखिकाओं की कोशिशों को परख सकें। जाहिर है, इस प्रयत्न में वे सफल हुई हैं और दोनों कृती कथाकारों को उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप देख पाने में भी उन्हें सफलता मिली है।

कृष्णा सोबती और मन्नू भंडारी बड़े फलक की लेखिकाएं हैं जिनके लेखन का क्षेत्र विस्तृत मानव समाज है जिसमें परिवार, समाज और राजनीति सहित समस्त देशकाल शामिल है। निश्चित रूप से स्त्री विमर्श उनके लेखन का एक हिस्सा ही है, समग्र रूप नहीं। उर्मिला शर्मा ने अपनी पुस्तक में इस तथ्य को गम्भीरता से लेते हुए जहां स्त्री विमर्श में उनके लेखन के महत्व को सामने रखा है, वहीं उनके अवदान के दूसरे पक्षों पर भी संक्षिप्त ही सही, प्रकाश डाला है। इस स्तर पर यह पुस्तक उपयोगी बन सकी है. इसमें संदेह नहीं है।

About The Author

उर्मिला शर्मा

जन्मस्थान : ग्राम – ससना, जिला-छपरा (बिहार) में 9 जुलाई को जन्म ।

शिक्षा : एम. ए. (हिंदी), पी-एच.डी।

प्रकाशन : विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में

शोध-आलेख, कहानी और कविताएँ प्रकाशित । आकाशवाणी से समय-समय पर साहित्य के विभिन्न विषयों पर वार्ताएं प्रसारित ।

स्त्री विषयक विमर्शों में गहरी अभिरुचि और उससे सम्बंधित प्रश्नों पर निरन्तर हस्तक्षेप ।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “स्त्री विमर्श के आयाम”

Your email address will not be published. Required fields are marked

Featured Products