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उनको प्रणाम (पी. एन सिंह लिखित श्रद्धांजलि)

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Author Name – Gopeshvar Singh
जे.पी. आन्दोलन में सक्रिय रहे। इस दौरान कई बार जेल यात्रा। 1983 से अध्यापन। पटना विश्वविद्यालय, पटना एवं सेण्ट्रल युनिवर्सिटी, हैदराबाद में करीब दो दशक तक अध्यापन के बाद सितंबर 2004 से दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। 2010 से 2013 तक हिन्दी विभाग के अध्यक्ष।

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उनको प्रणाम (पी. एन सिंह लिखित श्रद्धांजलि) - Unko Pranam (P. N Singh Likhit Shradhanjaliya)

Description

जे.पी. आन्दोलन में सक्रिय रहे। इस दौरान कई बार जेल यात्रा। 1983 से अध्यापन। पटना विश्वविद्यालय, पटना एवं सेण्ट्रल युनिवर्सिटी, हैदराबाद में करीब दो दशक तक अध्यापन के बाद सितंबर 2004 से दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। 2010 से 2013 तक हिन्दी विभाग के अध्यक्ष। साहित्य के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर हिन्दी की प्रायः सभी महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन। नलिन विमोचन शर्मा (विनिबन्ध), साहित्य से संवाद, आलोचना का नया पाठ, भक्ति आंदोलन और काव्य तथा आलोचना के परिसर के अतिरिक्त भक्ति आन्दोलन के सामाजिक आधार, नलिन विमोचन शर्माः संकलित निबन्ध, कल्पना का उर्वशी विवाद, शमशेर बहादुर सिंहः संकलित कविताएँ एवं नलिन विमोचन शर्माः रचना-संचयन, विजयदेव नारायण साहीः रचना-संचयन (संपादित) पुस्तकें प्रकाशित। आपको आचार्य परशुराम चतुर्वेदी सम्मान तथा रामविलास शर्मा आलोचना और कबीर विवेक सम्मान सम्मान प्राप्त है।

About The Author

उनको प्रणाम’ डॉ. पी. एन. सिंह द्वारा 22 महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों, विद्वानों, आलोचकों और रचनाकारों को लिखित रूप में दी गई श्रद्धांजलियों का संग्रह है। इस नाम से कोई श्रद्धांजलि प्रस्तुत संग्रह में नहीं है। इस नामकरण की मूल प्रेरणा नागार्जुन की कविता ‘उनको प्रणाम!’ है। इस कविता में ऐसे कर्मवीरों को श्रद्धांजलि दी गई है जो अपनी छोटी-सी दुनिया से निकलकर कुछ बड़ा काम करने और देश-समाज को बदलने की यात्रा पर निकले थे. उन कर्मवीरों ने अपने कर्मठ और त्यागमय जीवन में बहुत कुछ किया, समय और समाज पर अपनी छाप भी छोड़ी, लेकिन समाज को बदलने में पूर्णतः सफल नहीं हुए. कुछ को आंशिक सफलता मिली, कुछ असफल हुए. महत्त्व इस बात का नहीं है कि वे पूर्णतः सफल नहीं हुए. महत्त्व इस बात का है कि वे अपने कर्म-पथ पर निरंतर चलते रहे।

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